शायद अपोलो 11 की वो चीजें जिनके बारे में नहीं जानतें होंगे आप

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जयपुर। अपोलो 11 के मून प्रोग्राम को को बिते हुए 50 वर्ष हो चुके है लेकिन उस समय की इस उपलब्धी का आज भी वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी उपलब्धी मानी जाती है। इसे आज भी मानव सभ्यता की सबसे बड़ी तकनीकी उपलब्धी माना जाता है।इस मिशन में 16 जुलाई,1969 को अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग, बज़ एल्ड्रिन और माइकल कोलिंस विशाल सैटर्न वी रॉकेट के ऊपर अपने अपोलो अंतरिक्षयान में सवार थे। ये महज 11 मिनटों में ही कक्षा में प्रवेश करने में कामयाब हो गये थे। इसके चार दिन बाद आर्मस्ट्रांग और एल्ड्रिन चंद्रमा की सतह पर पैर रखने वाले पहले इंसान बने। इस मिशन की कुछ ऐसी बाते है जिनके बारे में शायद ही बहुत कम लोग जानते हैं। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि सैटर्न—5 अब तक का सबसे ताकतवर रॉकेट है। इसकी ऊंचाई 100 मीटर से भी ज्यादा थी।सैटर्न 5 के लॉन्च होने के समय एक सेकंड में 20 टन ईंधन जला था। अपोलो का क्रू कम्पार्टमेंट एक बड़ी कार के बराबर था,जिसका आकार 3.9 मीटर (12.8फ़ुट) था। इस मिशन को पूरा करने के लिए गणित में कुशल अफ्ऱीकी-अमरीकी महिलाओं ने चंद्रमा तक के रास्ते का खाका खींचने में मदद की। जब पहली बार कंप्यूटर आए, तो नासा के कई शुरुआती प्रोग्रामर और कोडर ये महिलाएं ही थीं। इस बारे में अब कोई नहीं जानता है कि अपोलो 11 मॉड्यूल कहा है। रिपोर्ट के अनुसार कुल 10 चंद्र मोड्यूल को अंतरिक्ष में भेजा गया था। जिनमें से छह ने इंसान को चंद्रमा पर उतारा था। बताया गया है कि एक बार इस्तेमाल होने के बाद कैप्सूल को छोड़ दिया गया था। लेकिन उसके बाद उसका पता नहीं चला कि वो चंद्रमा की सतह पर कही ​गिर गये या फिर पृथ्वी के वायुमण्डल में जलकर खत्म हो गये। अभी तक इसकी वास्तविकता को किसी को भी पता नहीं है।

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