मंत्रालयों की योजनाओं का डैशबोर्ड पर दिखेगा प्रदर्शन

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मंत्रालयों की योजनाओं का प्रदर्शन अब डैशबोर्ड पर दिखेगा। जनजातीय कार्य मंत्रालय ने योजनाओं की आसानी से मॉनीटरिंग के लिए डैशबोर्ड सिस्टम अपनाया है। जनजातीय कार्य मंत्रालय अब उन मंत्रालयों के कार्यों की भी ऑनलाइन मॉनीटरिंग कर सकेगा, जो अपने बजट का एक निश्चित हिस्सा अनुसूचित जाति, जनजाति के कल्याण और विकास के लिए खर्च करते हैं। 2019-20 में 275 से अधिक योजनाओं में 41 मंत्रालयों को 51,000 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था। संबंधित मंत्रालयों ने बजट का किस तरह से इस्तेमाल हुआ है, इसका पूरा ब्यौरा मंत्रालय की वेबसाइट पर दिखेगा।

मंत्रालय की ओर से बताया गया है कि डैशबोर्ड एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों और वहां पढ़ने वाले छात्रों के जिलेवार विवरण प्रदर्शित करता है। इतना ही नहीं मंत्रालय की ओर से किस एनजीओ को कितनी धनराशि दी गई है, कितने लाभार्थियों तक सुविधाएं पहुंचीं हैं, ये ब्यौरे भी डैशबोर्ड पर उपलब्ध रहेंगे। अनुसूचित जनजाति विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति, मंत्रालय की ओर से अपनाई गई नई पहल के लिंक भी डैशबोर्ड पर दिखेंगे।

मंत्रालय के अधिकारियों ने बताा कि डैशबोर्ड डिजिटल इंडिया पहल का हिस्सा है, जो जनजातीय लोगों को सशक्त बनाने की दिशा में काम करेगा और प्रणाली में पारदर्शिता लाएगा। डैशबोर्ड को राष्ट्रीय सूचना केन्द्र (एनआईसी) के तहत सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑफ डेटा एनालिटिक्स (सीईडीए), संगठन की ओर से विकसित किया गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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