सैन्य कर्मियों के परिवार के लोग ही असली हीरो : अभिनेत्री सोनल चौहान

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अभिनेत्री सोनल चौहान ने कहा कि वह सेना में शामिल लोगों के परिवार को असली हीरो मानती हैं। सोनल ने जे.पी.दत्ता की फिल्म ‘पलटन’ के जरिए लंबे समय के बाद बॉलीवुड में वापसी की है।

सोनल ने मुंबई से आईएएनएस को फोन पर बताया, “हम अक्सर हमारे बहादुर सैनिकों की प्रशंसा और सम्मान करते हैं लेकिन हमें उनके परिवारों की महत्वपूर्ण भूमिका को नहीं भूलना चाहिए। सैनिकों के परिवारों को भी याद किया जाना चाहिए और सम्मानित किया जाना चाहिए।”

उन्होंने कहा, “किसी ऐसे व्यक्ति को सीमा पर भेजना और देश के लिए अपनी जान खतरे में डालने देना. जिससे आप बहुत प्यार करते हैं, इसके लिए बहुत ही हिम्मत की जरूरत होती है। सैन्य कर्मियों के जीवनसाथी भी मजबूती से सभी समस्याओं का सामना करती हैं और उनका समर्थन करती हैं। वास्तव में सैन्य कर्मियों का परिवार और प्रियजन असली नायक हैं।” युद्ध पर आधारित ‘पलटन’ सात सितंबर को रिलीज हुई थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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