सुल्तापुर के लोग निडर व आजाद होकर जिंदगी जीएं : मेनका

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पूर्व केन्द्रीय मंत्री व सुलतानपुर से सांसद मेनका गांधी सोमवार को यहां एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यहां किसी को डरने की जरूरत नहीं है, और अब यह क्षेत्र उनका है, तथा अब लोग निडर व आजाद होकर अपनी जिंदगी जीएं।

मेनका ने कहा, “जनता को कोई भी परेशानी हो, तुरंत उनसे शिकायत कर सकता है। उसका निस्तारण होगा। अब यहां के लोग आजाद व निडर होकर अपनी जिंदगी जीएं। पुलिस, तहसीलदार, कलेक्टर चाहे जो अधिकारी हो, अगर वह काम करेगा तो रहेगा। नहीं तो जनपद छोड़कर दूसरे जिले में चला जाएगा।”

पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने अरवल, इसौली, हैहनाकला, बीहीनिदूरा में जनसभा कर जनता से निडर रहने को कहा। उन्होंने कहा, “अब सुल्तानपुर के इसौली में डरने की जरूरत नहीं है। जिस दिन से मैं जीती हूं, उस दिन से अच्छा हो रहा है। सुलतानपुर में भ्रष्टाचारियों को कोई स्थान नहीं मिलेगा। गलत अधिकारी अपने लिए किसी दूसरी जगह की तलाश कर लें। मैं विकास करूंगी, जिससे आप लोगों को समस्या से निजात मिल सके।”

मेनका अपने संसदीय क्षेत्र के तीन दिवसीय दौरे पर सोमवार को यहां पहुंची हैं।

News source आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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