पीबीएल-4 : सिंधु की मेहनत बर्बाद, हंटर्स को हरा मुंबई फाइनल में

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आंद्रेस एंटोनेसन ने शनिवार को यहां कांतीरावा स्टेडियम में खेले गए वोडाफोन प्रीमियर बैडमिंटन लीग (पीबीएल) के चौथे सीजन के दूसरे सेमीफाइनल में पीवी. सिंधु की मेहनत को बर्बाद कर मुंबई रॉकेट्स को मौजूदा विजेता हैदराबाद हंटर्स के खिलाफ 4-2 से जीत दिला मुंबई को फाइनल में पहुंचा दिया। मुंबई तीसरी बार फाइनल में पहुंची है। फाइनल में वह रविवार को मेजबान बेंगलुरू रैप्टर्स के खिलाफ कोर्ट पर उतरेगी। बेंगलुरू ने अवध वॉरियर्स को 4-2 से हरा कर फाइनल में प्रवेश किया था।

हंटर्स की टीम पहले दो मैच हारने के बाद 0-3 से पीछे थी, लेकिन उसकी स्टार खिलाड़ी पीवी. सिंधु ने अपना मैच जीत मौजूदा विजेता को दो अंक दिलाकर उसे मैच में बनाए रखा था। यह सिंधु का ट्रम्प मैच था जिसे जीतकर उन्होंने दो अंक अपनी टीम को दिलाए, लेकिन मुंबई के आंद्रेस एंटोनसेन ने पुरुष एकल के अगले मैच में जीत हासिल कर सिंधु की जीत का जाया कर मुंबई को खिताबी मुकाबले में पहुंचाया।

इसके बाद का मैच मिश्रित युगल का था लेकिन विजेता का फैसला इस मैच से हो चुका था इसलिए आखिरी मैच नहीं खेला गया।

दिन का पहला मुकाबला पुरुष युगल था, जिसमें हंटर्स की ओर से किम सा रांग और बोइन इसारा ने रॉकेट्स के ली वोंग देई के सामने चुनौती पेश की। इस मैच में मुंबई की जोड़ी ने 15-14, 15-12 से जीत हासिल कर अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया।

दूसरा मुकाबला पुरुष एकल था, जिसमें हंटर्स के लिए मार्क कालोउ ने समीर वर्मा को चुनौती दी। समीर रॉकेट्स के लिए ट्रम्प मैच खेल रहे थे। समीर ने यह मैच 15-8, 15-7 से अपने नाम किया।

समीर ने शानदार शुरुआत करते हुए 5-1 की बढ़त ले ली और ब्रेक में 8-2 के स्कोर के साथ गए। ब्रेक के बाद भी समीर ने अपनी बढ़त को जाने नहीं दिया, हालांकि मार्क ने ब्रेक के बाद ज्यादा अंक बटोरे लेकिन वह समीर की बराबरी भी नहीं कर पाए।

समीर ने दूसरे गेम में भी अपना वर्चस्व जारी रखा रखा और 6-2 की बढ़त ले ली। ब्रेक में एक बार फिर समीर 8-2 के स्कोर के साथ गए। इस गेम में भी समीर ने मार्क को वापसी नहीं करने दी।

समीर ने इस मैच को जीत मुंबई को 2-1 से आगे कर दिया। यह मुंबई का ट्रम्प मैच था और पीबीएल में ट्रम्प मैच जीतने वाली टीम को दो अंक मिलते हैं।

तीसरे मुकाबले में हंटर्स की कप्तान और स्टार खिलाड़ी पीवी सिंधु ने महिला एकल में अपनी टीम का ट्रम्प मैच खेलते हुए श्रीयांशी परदेसी को चुनौती दी। सिंधु ने यह मैच आसानी से 15-6, 15-5 से अपने नाम किया।

सिंधु ने पहले गेम में अच्छी शुरुआत की और 4-1 से बढ़त ले ली। परदेशी ने अच्छी वापसी करते हुए अंकों के अंतर को कम किया लेकिन सिंधु फिर भी ब्रेक में 8-6 की बढ़त के साथ गईं। ब्रेक के बाद हालांकि सिंधु ने परदेशी को बैकफुट पर ही रखा और एक भी अंक नहीं लेने दिया।

दूसरे गेम में सिंधु ने एकतरफा खेल दिखाया और 7-1 से आगे हो गईं। यहां परदेशी ने दो अंक जरूर लिए लेकिन एक बार फिर सिंधु 8-3 की बढ़त के साथ ब्रेक में गईं। ब्रेक के बाद परदेशी सिर्फ दो अंक ही ले पाईं और मैच हार गईं।

इसके बाद पुरुष एकल मैच था, जिसमें हंटर्स के लिए ली ह्यून इल और रॉकेट्स के लिए आंद्रेस कोर्ट पर उतरे। आंद्रेस ने यह मैच 15-13, 15-6 से अपने नाम कर मुंबई को तीसरी बार फाइनल में पहुंचाया।

आखिरी मैच मिश्रित युगल का था जिसमें हंटर्स के लिए किम सा रांग और इयोम हेई वोन ने किम जी जुंग और पिया जेबादिया की जोड़ी को कोर्ट पर उतरना था, लेकिन मैच का फैसला पहले ही आने के कारण यह मैच नहीं खेला गया।

न्यूज स़ेत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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