पेटीएम ने सीआरपीएफ कर्मियों के लिए 47 करोड़ रुपये एकत्र किए

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डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम ने गुरुवार को सीआरपीएफ वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन की अध्यक्ष मनु भटनागर को 47 करोड़ रुपये का चेक सौंपा। यह पैसा सीआरपीएफ ब्रेवहार्ट्स के लिए प्राप्त योगदानों से एकत्रित किया गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि 14 फरवरी को सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले के बाद पेटीएम ने धन एकत्रित करने की यह मुहिम शुरू की। 15 फरवरी से लेकर 10 मार्च तक 20 लाख से ज्यादा पेटीएम प्रयोक्ता आगे आए और उन्होंने रक्षा बलों के साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित करते हुए योगदान किया।

धन एकत्रित करने के लिए पेटीएम ने सीआरपीएफ वाइव्स वेलफेयर एसोसिएशन के साथ सहयोग किया और अपने उपभोक्ताओं को सुविधा दी कि वे पेटीएम मोबाइल एप और वेबसाइट के जरिए योगदान दें जिसे सीडब्ल्यूए के धनकोष में जमा कराया जा सके। 80जी के तहत कर लाभ लेने के लिए पेटीएम उपभोक्ताओं को सिर्फ अपना नाम और पैन कार्ड नंबर दर्ज करना था। एप के जरिए किया गया सारा दान ट्रांजैक्शन फीस से मुक्त था।

पेटीएम के सीओओ किरन वासीरेड्डी ने कहा, “इस हमले में शहीद हुए जवानों और उनके परिवारों के साथ हमारी प्रार्थनाएं हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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