घर मे हुई मृत्यु, टोल प्लाजा बंद होने पर राहगीर महिला ने लगाई Farmers को फटकार

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किसानों के विरोध प्रदर्शन के 100 दिन पूरे होने पर किसानों ने केएमपी एक्सप्रेसवे पर 5 घंटे की नाकाबंदी करने का आह्वान किया है। ऐसे में डासना टोल पर एक राहगीर महिला ने किसानों की फटकार लगाई। दरअसल किसानों ने कुंडली की ओर जाने वाले डासना टोल पर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ऐसे में महिला के घर किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाने के कारण उसे जाने में समस्या हुई। महिला और उसके पति ने प्रशासन से जाने की गुजारिश भी की।

कई देर तक खड़े होने के बाद जब महिला नहीं जा सकी तो वह रोने लगी, उसके बाद महिला का गुस्सा किसानों पर फुट पड़ा, एक तरफ महिला ने किसानों को जमकर कोसा तो वहीं उनको फटकार भी लगाई।

इतना सुनते ही स्थानीय प्रशासन के लोग महिला के पास आए और उन्हें डासना टोल से जाने की इजाजत दी।

हालांकि, कुछ किसान गाजीपुर बॉर्डर से डासना टोल पहुंचे हुए हैं, वहीं सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा रहें हैं। किसानों के मुताबिक, यह पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।

किसानों ने डासना स्थित इस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस वे पर बैठ कर गुजरने वाली गाड़ियों को रोक दिया है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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