हिमाचल प्रदेश में बंद का आंशिक रूप से असर

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तेल की बढ़ी कीमतों के विरोध में आहूत ‘भारत बंद’ का असर हिमाचल प्रदेश में सोमवार को आंशिक रूप से देखने को मिल रहा है। बैंकों और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बड़े पैमाने पर खुले हुए हैं, जबकि कुछ शहरों में दुकानें बंद हैं।

पुलिस अधिकारियों ने यहां बताया कि हालांकि, हड़ताल के कारण यातायात के प्रभावित होने की कोई खबर नहीं है और हिंसा की भी कोई खबर नहीं है।

हालांकि, राज्य में निजी बस संचालक बस के किराए में वृद्धि की मांग को लेकर हड़ताल कर रहे हैं।

एक कांग्रेस नेता ने आईएएनएस को यहां बताया, “विरोध प्रदर्शन राज्य में किसी को भी अपनी दुकानों और प्रतिष्ठानों को बंद करने के लिए मजबूर किए बिना शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है।”

कांग्रेस द्वारा आहूत बंद का प्रभाव राज्य की राजधानी शिमला और सोलन जिले के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ औद्योगिक क्षेत्र और सिरमौर में काला अंब में अधिक है।

सोलन, धर्मशाला, कांगड़ा, पालमपुर, मंडी, रामपुर, कुल्लू और ऊना और हमीरपुर में बंद का असर आंशिक रूप से है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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