पेरिस मैराथन कोविड-19 के कारण रद्द

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पेरिस मैराथन का 2020 संस्करण कोविड-19 के कारण बुधवार को रद्द कर दिया गया है। इस मैराथन को स्थगित कर 15 नवंबर को आयोजित किया जाना था लेकिन कोविड-19 के कारण इसका आयोजन संभव होता मुश्किल देख इसे अंतत: रद्द कर दिया गया। सबसे पहले इस मैराथन का आयोजन 5 अप्रैल को होना था जिसे नवंबर तक के लिए स्थगित कर दिया गया था। अब आयोजकों ने फैसला किया है कि इस मैराथन को इस साल रद्द कर दिया जाए। अब यह मैराथन अगले साल होगी।

बीबीसी ने आयोजकों द्वारा जारी बयान के हवाले से लिखा है, “इस मैराथन के लिए जिन्होंने अपने ेसमय का बलिदान कर ट्रेनिंग की उनको काफी निराशा होगी। हम पेरिस के साथ इस मैराथन को 2021 में आयोजित कराने को लेकर काम करेंगे जहां विश्व के जुनूनी धावक एक साथ मिलकर हिस्सा ले सकें।”

पेरिस मैराथन को रद्द करने का फैसला लंदन मैराथन के तीन अक्टूबर को आयोजित कराने के ऐलान के एक दिन बाद आया है।

इस साल बोस्टन, बर्लिन, न्यू यार्क और शिकागो मैराथन को कोविड-19 के कारण पहले ही रद्द कर दिया गया है।

न्यूज स्त्राते आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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