पैरा-एशियाई खेल (एथलेटिक्स) : गेम रिकॉर्ड तोड़कर जयंती ने जीता रजत

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भारतीय एथलीट जयंती बेहेरा ने गेम रिकॉर्ड तोड़ते हुए यहां जारी पैरा-एशियाई खेलों में गुरुवार को रजत पदक अपने नाम किया। इसके अलावा, एक अन्य भारतीय महिला एथलीट राधा वेंकटेश ने 400 मीटर टी-12 स्पर्धा का कांस्य अपने नाम किया।

जयंती ने महिलाओं की 400 मीटर टीएफ-45/46/47 रेस स्पर्धा में रजत पदक हासिल किया। इस स्पर्धा के फाइनल में जयंती ने 59.71 सेकेंड का समय लेकर दूसरा स्थान हासिल किया और रजत पदक पर अपना कब्जा जमा लिया। उन्होंने थाईलैंड की गागुन पागजीरापोर्न द्वारा बनाए गए 01 मिनट और 05.93 सेकेंड के गेम रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

चीन की ली लु ने 58.39 सेकेंड में इस स्पर्धा को पूरा किया और अपना सीजन बेस्ट देते हुए स्वर्ण पर निशाना साधा। इसके अलावा, जापान की साए शिगेमोटो ने 59.74 सेकेंड में तीसरा स्थान हासिल कर कांस्य पदक जीता।

इसके अलावा, महिलाओं की 400 मीटर टी-12 स्पर्धा के फाइनल में राधा ने 1 मिनट और 07.03 सेकेंड का समय लेकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक जीता।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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