डिजिटल प्रौद्योगिकी के दोषपूर्ण पहलुओं से निपटेगा पैनल

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संयुक्त राष्ट्र महासचित एंटोनियो गुटेरस ने साइबर युद्ध सामग्री और नफरत फैलाने जैसे डिजिटल नवाचार के दोषपूर्ण पहलुओं से निपटने के लिए डिजिटल सहयोग को लेकर एक पैनल का गठन किया है। पैनल में प्रौद्योगिकी की अंतिम पंक्ति के लोग और नीति नियंता शामिल हैं।

उन्होंने भारतीय राजनयिक अमनदीप गिल को पैनल के सचिवालय का कार्यकारी निदेशक नियुक्त किया है।

20-सदस्यीय इस पैनल के सह अध्यक्ष चीनी प्रौद्योगिकी व ई-कॉमर्स की अग्रणी कंपनी अली बाबा के संस्थापक जैक मा और माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक बिल गेट्स की पत्नी और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन की सह-अध्यक्ष मेलिंडा गेट्स हैं।

गुटेरस ने गुरुवार को कहा, “पैनल डिजिटल प्रौद्योगिकी के ट्रेड की माप करेगा और फासले व अवसर की पहचान करेगा। साथ ही, पैनल अंतर्राष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने के लिए प्रस्तावों का प्रारूप तैयार करेगा।”

उन्होंने कहा, “जब कृत्रिम बुद्धिमता से लेकर ब्लॉकचेन और रोबोटिक्स जैसे नई प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में रोज प्रगति हो रही है तब दुनिया अभी सिर्फ नवाचार के दोषपूर्ण पहलुओं जैसे साइबर सुरक्षा की चुनौतियों, साइबर युद्ध के खतरों, नफरत की भाषा के प्रसार और निजता के उल्लंघन का समाधान करने के बारे में सोचना शुरू की है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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