क्लब के मेन्यू से पामेला ने हटवाए फोइ ग्रास

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अभिनेत्री और पशुओं के हित के लिए लड़ने वाली पामेला एंडरसन ने यहां के प्लेबॉय क्लब में फोइ ग्रास पर प्रतिबंध लगाए जाने की अपनी लड़ाई में जीत हासिल की है। फोइ ग्रास एक लग्जरी भोज्य पदार्थ है जिसे बत्तख या हंस के जिगर से तैयार किया जाता है और इन्हें एक बेहद ही खास तरीके से स्थूल बनाया जाता है।

फ्रांसीसी कानून के मुताबिक, फोइ ग्रास के लिए बत्तखों को एक बेहद ही निर्मम प्रक्रियाओं में से होकर गुजरना पड़ता है, जिसे गावेज कहा जाता है। इसके तहत उनके लीवर को चर्बीयुक्त बनाने के लिए एक फीडिंग ट्यूब की मदद से उन्हें जबरदस्ती कॉर्न खिलाया जाता है।

एसेशोबिज की रिपोर्ट के मुताबिक, अभिनेत्री ने क्लब के प्रमुखों से फोइ ग्रास की बिक्री को बंद करने का आग्रह किया था, उन्होंने कहा था कि पक्षियों को जबरदस्ती खिला-खिलाकर इसे बनाया जाता है।

हालांकि क्लब के प्रमुखों ने अब अपने मेन्यू से इस डिश को हटाए जाने की बात पर अभिनेत्री को आश्वस्त किया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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