भारत से आधी रह गई पाकिस्तानी रूपए की कीमत, छाया आर्थिक संकट

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जयपुर. पाकिस्तान में आर्थिक संकट के बादल मंडराने लगे है। मंगलवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले पाकिस्तानी रूपया की कीमत 122 रूपये हो गई, जो भारतीय रूपये से आधी है। फिलहाल भारतीय रूपये की कीमत अबी 67 रूपये है।

पाकिस्तान सेंट्रल बैंक पिछले सात महीनों में करीब तीन बार अपने रूपये का अवमूल्यन करवा चुका है। लेकिन इससे अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर कोई फर्क नहीं दिखाई दे रहा है, रॉयटर्स समाचार एजेंसी के अनुसार पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक भुगतान संकट के संतुलन से बचने की कोशिश कर रहा है। वहीं पाकिस्तान में जुलाई में आम चुनाव होनें वाले है, चुनाव से पहले आई आर्थिक मंदी को भविष्य की गंभीर चिंता के रूप में माना जा रहा है।

लगातार हो रही गिरावट को लेकर द स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने कहा है कि देश की आर्थिक हालात पर हम लोगों की नजर बनी हुई है। यह जो समस्या आई है ये बाजार में हुई उठा-पटक का परिणाम है। वहीं पाकिस्तान नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी के एक अर्थशास्त्री असफाक हसन खान ने कहा कि अभी पाकिस्तान में अंतरिम सरकार है, और वह इस चुनावी वक्त पर आईएमएफ जाने पर मजबूर हो सकती है।

वहीं स्टेंडर्ड चार्टर्ड बैंक का आंकलन है कि इस साल के अंत तक पाकिस्तानी रूपये की कीमत 125 रूपये कर गिर सकती है। हालांकी कुछ व्यापारिक संस्थानों का कहना हे कि डॉलर की मांग बहुत ज्यादा बढ़ने से कीमत कम हुई है। एसबीपी ने हस्तक्षेप नहीं किया और कीमत को गिरने दिया। पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने लगातार तीसरी बार रूपये की कीमत में कटौती की है, पीएसबी की ओर से दिसंबर से लेकर अब तक 14 फीसदी कीमत घटाई गई है।

सूत्रों के हवाले से खबर आ रही है कि पाकिस्तान इस स्थिति से उभरने के लिए आईएमएफ से कर्ज लेगा, इससे पहले उसने 2013 में भी आईएमएफ से कर्ज् लिया था, विशेषज्ञों का कहना है कि

आईएमएफ करेंसी की वैल्यू घटाने के लिए कह सकता है। इसलिए पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि वह पहले से ही इसकी तैयारी कर रहा है।

सिर्फ दस डॉलर बचा है विदेशी मुद्रा भंडार

बीस लाख करोड़ भारतीय रूपए की इकोनॉमी वाले पाकिस्तान का चालू खाते का घाटा जीडीपी के 5.3 प्रतिशत तक पहुंच गया है। वहीं विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ दस लाख अरब डॉलर का रह गया है। यह बीते तीन सालों में सबसे कम है, इससे सिर्फ दो महिनों का आयात किया जा सकता है।

भारत पर भी पड़ेगा असर

पाकिस्तान सुख्य रूप से कपड़ा व चावल निर्यात में भारत की बराबरी करता है। कुछ हद तक सीमेंट और इंजीनियरिंग में भी माना जाता है। आपकों बता दे कि कम विकसित देश होनें की वजह से पाकिस्तान से आयात पर यूरोप में कोई शुल्क नहीं लगता, वहीं भारत के विकासशील देश होनें से भारत से आयात पर टेक्स लगता है। करेंसी संस्ती होनें से पाकिस्तान का निर्यात ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है।

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