Pakistan : पेशावर मदरसा विस्फोट मामले में अब तक 55 गिरफ्तार

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पेशावर मदरसा विस्फोट मामले में कम से कम 55 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस सप्ताह की शुरुआत में हुए विस्फोट में आठ लोगों की मौत हो गई थी और 120 अन्य घायल हो गए थे। डॉन न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, बुधवार को जारी बयान में, पुलिस ने कहा कि एक बड़ी कार्रवाई के तहत गिरफ्तारियां की गई, जिसके तहत, त्वरित प्रतिक्रिया बल, महिला पुलिस और बम डिस्पोजल यूनिट ने जामिया जुबेरिया मदरसा के पास दीर कॉलोनी में कार्रवाई की।

बयान में कहा गया कि संदिग्धों से पूछताछ के लिए विशेष जांच टीम का गठन किया गया है।

इसबीच, आतंकवाद-रोधी विभाग ने मंगलवार को हुए विस्फोट के लिए अज्ञात हमलावारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया है।

द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, यह विस्फोट तब हुआ, जब मदरसे में 40-50 बच्चे मौजूद थे।

अभी तक किसी भी आतंकवादी संगठन ने हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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