कोरोना संकट: लॉकडाउन से बंद हो सकती हैं 7 लाख से ज्यादा छोटी दुकानें

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देश में कोरोना संकट से निजात पाने के लिए लागू लॉकडाउन से छोटे कारोबारी सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। लॉकडाउन में कारोबार ठप होने से पूरे देश में 7 लाख से ज्यादा दुकानें स्थायी तौर पर बंद हो सकती है। इन दुकानों में 6 लाख के करीब किराना और 1 लाख रिटेल स्मार्टफोन विक्रेता शामिल हैं।

कंज्यूमर गुड्स कंपनीज का कहना है कि कोरोना संकट और लॉकडाउन का असर छोटे दुकानदारों पर पड़ा है। इसके चलते दुकानदारों क सामने नकदी का संकट खड़ा हो गया है।एक वजह दुकान मालिकों के गांव लौटने की भी है। कंपनीज को डर है कि लॉकडाउन के बीच ज्यादातर लोग गांव लौट चुके हैं जो अब शायद ही वापस काम पर लौट सकें। इसके चलते अब ये दुकानें दोबार नहीं खुल सकेगी।

मोबाइल हैंडसेट सेक्टर पर भी कोरोना का खतरा मंडराने लगा है। ऑल इंडिया मोबाइल रिटेल्स एसोसिएशन के अनुसार, गैर जरूरी सामानों की बिक्री मिलने के बाद भी रिटेल में स्मार्ट फोन को बेचने वाली 60 प्रतिशत से ज्यादा दुकानें वापस नहीं खुल पाई हैं। एसोसिएशन से 1.5 लाख के करीब रिटेलर्स जुड़े हुए हैं। इंडस्ट्री को डर है कि कोरोना संकट से चलते रिकवरी में देरी हो सकती है।

इस इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि इस समय डिस्ट्रीब्यूटर  नकदी के लेन-देन कर रहे हैं। अब वो पहले की तरह रिटेलर्स को 7 से 21 दिन का क्रेडिट नहीं दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि पारले उत्पाद बेचने वाली 58 लाख छोटी दुकानों में से 10 प्रतिशत अप्रैल और मई के महीने में बंद हो चुकी है।

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