मोदी सरकार के 89 सचिवों में सिर्फ एक एससी और तीन एसटी, एक भी ओबीसी नहीं

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जयपुर। वर्तमान समय में भारत सरकार के 89 सचिवों में से सिर्फ एक सचिव अनुसूचित जाति और तीन सचिव अनुसूचित जनजाति वर्ग से है वही सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि इन उन 89 सचिव सचिवों में से एक भी व्यक्ति अन्य पिछड़ा वर्ग यानी ओबीसी से नहीं है.

आपको बता दें कि पिछले महीने 10 जुलाई को तृणमूल कांग्रेस के सांसद दिव्या इंदु अधिकारी द्वारा पूछे गए एक सवाल के जवाब में केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने इस बात की जानकारी दी है और इस सूची में शामिल ज्यादातर सचिव भारतीय प्रशासनिक सेवा आईएएस से हैं.

आपको बता दें कि केंद्र सरकार द्वारा ही जारी करी गए आंकड़ों के मुताबिक बताया जा रहा है कि एससी-एसटी और ओबीसी समुदाय के लोगों का प्रतिनिधित्व अतिरिक्त सचिव संयुक्त सचिव निदेशक स्तर पर भी काफी कम है.

वह इसके अलावा केंद्र सरकार के मंत्रालयों में कुल 93 अतिरिक्त सचिव है लेकिन इसमें से भी सिर्फ 6 लोग ऐसी पांच लोग एससी-एसटी समुदाय से हैं और इस समय एक भी अतिरिक्त सचिव ओबीसी समुदाय से वहां पर नहीं है और इस तरह केंद्र में अतिरिक्त सचिव के स्तर पर सिर्फ 6.45 फीसद लोग ऐसी और 5.38 फीसद लोग एसटी समुदाय से हैं.

ओबीसी आरक्षण लागू किए जाने के बाद 1993 से मंत्रालय ओबीसी अधिकारियों का आंकड़ा रखता है. मंडल आयोग की सिफारिशों के बाद से, सरकार ने सरकारी नौकरियों में ओबीसी के लिए 27.5 प्रतिशत, एससी के लिए 15 प्रतिशत और एसटी के लिए 7.5 प्रतिशत आरक्षण अनिवार्य कर दिया है.

वही आपको बता दें कि अब इन आंकड़ों से एकदम साफ और पूरी तरीके से यह स्पष्ट हो जाता है कि किस तरीके से सरकार के उच्चतम स्तर पर आरक्षित वर्गों के लोगों का प्रतिनिधित्व कितना कम है.

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