Origin of gayatri mantra: कैसे हुई गायत्री मंत्र की उत्पत्ति, जानिए जाप के फायदें

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हिंदू धर्म में पूजा पाठ के साथ साथ मंत्र जाप को भी बहुत ही खास माना जाता है वही गायत्री माता को हिंदू धर्म शास्त्रों में बहुत ही महत्व दिया गया हैं शास्त्रोक्त मान्यता है कि गायत्री मंत्र को समझने मात्र से चारों वेदों के ज्ञान की प्राप्ति होती हैं देवी मां गायत्री की पूजा से सभी इच्छाएं पूरी हो जाती हैं और मोक्ष भी मिलता हैं गायत्री माता को चारों वेदों की जन्मदात्री कहा गया हैं ज्योतिष के मुताबिक इस वेदों का सार भी गायत्री मंत्र को माना गया हैं मान्यता है कि चारों वेदों का ज्ञान प्राप्त करने के बाद जो पुण्य फल व्यक्ति को मिलता हैं अकेले गायत्री मंत्र को समझने मात्र से चारों वेदों का ज्ञान प्राप्त हो जाता हैं। तो आज हम आपको गायत्री मंत्र की उत्पत्ति के बारे में बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

ऐसा माना जाता हैं कि सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी पर गायत्री मंत्र प्रकट हुआ था। इसके बाद ब्रह्मा जी ने गायत्री मंत्र की व्याख्या देवी गायत्री की कृपा से अपने चारों मुखों से चार वेदों के रुप में की। प्रांरभ में गायत्री मंत्र केवल देवताओं के लिए ही था। मगर बाद में महर्षि विश्वामित्र ने अपने कठोर तपस्या से गायत्री मंत्र को आमजनों तक पहुंचाया।

ओम भूर्भव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं ।

भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।।

आपको बता दें कि इस मंत्र की महिमा अपरंपार मानी जाती हैं इस मंत्र के जपने मात्र से कई तरह के पापों और कष्टों का नाश होता हैं गायत्री मंत्र के जाप से पुण्य फल में वृद्धि होती हैं और कार्यों में सफलता मिलती हैं इसलिए शास्त्रों में गायत्री मंत्र के जाप का विधान बताया गया हैं। विशेष अवसरों पर इसका जाप करने से सिद्धियों की प्राप्ति होती हैं।

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