गरीबों को खिलाने वाले संगठन सीधे एफसीआई से खरीद सकते हैं अनाज

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देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान गरीबों को खाना खिलाने वाले गैर-सरकारी संगठन यानी एनजीओ या धर्मार्थ संगठन अब भारतीय खादय निगम यानी एफसीआई से निर्धारित दर पर सीधे गेहूं और चावल खरीद सकते हैं। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री रामविलास पासवान ने बुधवार को ट्वीट के जरिए कहा कि अब देशभर में चल रहे राहत शिविरों के लिए सामाजिक संगठन एक से 10 टन चावल और गेहूं एफसीआई के नजदीकी डिपो से ओपन मार्केट सेल स्कीम (ओएमएसएस) के तहत तय दर सीधे खरीद सकते हैं।

पासवान ने कहा कि कई राज्यों एवं सामाजिक संस्थाओं से यह मांग आ रही थी कि लॉकडाउन के मद्देनजर जरूरतमंदों के लिए चलाए जा रहे राहत शिविरों के संचालन के लिए खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए, जिसकी स्वीकृति दे दी गई है।

उन्होंने कहा कि संबद्ध जिले के जिलाधिकारी यह सुनिश्चत करेंगे कि सामाजिक संस्थाओं द्वारा ओएमएसएस के तहत तय दरों पर खरीदे गए खाद्यान्न का सही उपयोग हो रहा है और उस क्षेत्र के जरूरतमंद एवं गरीब लोगों को पौष्टिक भोजन मुहैया कराने के लिए इसका इस्तेमाल किया जा रहा है।

अब तक एफसीआई से ओएमएसएस के तहत सीधे गेहूं खरीदने की अनुमति राज्य सरकारों और बड़े पैमाने पर अनाज खरीदने वाले पंजीकृत खरीदार, जैसे रोलर फ्लोर मिलों को दी गई थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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