देश को उल्लू बना रहे हैं राष्ट्रवाद के नारे!

0
107
 लोकसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान होते ही चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है।पीएम मोदी इस चुनाव के ऐतिहासिक होने की बात कह रहे हैं, होना भी चाहिए। इस बार का चुनाव मुद्दों पर  नहीं राष्ट्रवाद के नाम पर लड़ा जाएगा। इसकी भूमिका बनना लोकसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान होने से पहले ही शुरू हो गई है। पुलवामा हमले के बाद पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक और फिर राष्ट्रवादों के नारों की गूंज बहुत कुछ साबित करती है।
पर क्या राष्ट्रवाद ही चुनावी मुद्दा होगा? क्या राष्ट्रवाद के नारे देश को उल्लू नहीं बना रहे हैं? क्या सत्तारूढ़ बीजेपी ने  राष्ट्रवाद के नाम पर अपनी असफलता नहीं छुपा रही है। अगर ये सब सही नहीं है तो फिर क्यों बेरोजगारी के आंकड़े बताने में सरकार का गला सूख रहा है, पिछले पांच सालों में किसानों की आमदानी में कितना इजाफा हुआ, इस बात को सरकार बताएगी । सरकार के कामों की जमीनी हकीकत क्या इस बात से जनता अनजान है।
मोदी सरकार ने पिछले पांच साल में कितना काम किया है मीडिया विशलेषण करके बतायाएगा या फिर मोदी की लोकप्रियता के सर्वे दिखाता रहेगा । पिछले एक माह के बीजेपी नेताओं के भाषणों को सुनिए, हम किसानों और बेरोजगारों पर नहीं बल्कि एंटी पाकिस्तान होने वाली बातों को सुनकर खुश हैं।कितने लोगों के खाते में 15 लाख आ गए। नोटबंदी जैसे फ्राड पर क्या खुलकर बात करेंगे प्रधानमंत्री।
सरकार  इस बात से चिंतिंत नहीं  है कि पिछले पांच सालों में कितनी बेरोजगारी बड़ी, किसानों की आमदानी में निरंतर कमी आई है। ऐसी तमाम गंभीर  बातों के बावजूद भी, प्रधानमंत्री मोदी क्या कर रहे हैं, उनकी लोकप्रियता बस लोगों की आंखों में धूल झौंकने का काम  कर रही है।

(लेखक के अपने विचार हैं)

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here