सिर्फ पूजा करने मात्र से ही मिलता है एक करोड़ शिवलिंग के जलाभिषेक का फल

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दोस्तों, श्रावण मास में हर इंसान भगवान शिव को प्रसन्न करने में लगा रहता है जिसके लिए वो उनकी पूजा पाठ करता हैं । आज हम आपको कोटेश्वर महादेव मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं । आपको बता दें कि, इस मंदिर की महिमा कुछ निराली हैं । इसके साथ ही आपको बता दें कि, इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि, इस मंदिर में जल चढाने से व्यक्ति को एक करोड शिवलिंग की पूजा का फल मिलता है । आइये जानते हैं इस मंदिर की कथा के बारे में।

जानकारी के अनुसार, भगवान श्री राम द्वारा न सिर्फ रामेश्वरम में पार्थिव पूजन किया था बल्कि तीर्थराज में भी उन्होंने एक शिवलिंग स्थापित किया था । प्रयाग के संगम से कुछ दूर गंगा किनारे स्थित है भगवान शिव का यह पावन धाम । भगवान राम जब लंका पर विजय प्राप्त करके वापस लौटते समय प्रयाग पहुंचे तो उन्होंने भारद्वाज मुनि से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लेने की अनुमति मांगी लेकिन भारद्वाज मुनि ने उनको आशीर्वाद देने से यह कहते हुए मना कर दिया कि उन्होंने ब्रह्म हत्या की है ।

तब भगवान राम ने इस पाप से मुक्ति का उपाय पूछा। इस पर भारद्वाज मुनि ने उन्हें प्रयाग के उत्तर में गंगा नदी के किनारे एक करोड़ शिवलिंग स्थापित करने को कहा। इस पर भगवान श्री राम ने भारद्वाज मुनि से एक करोड़ शिवलिंग बनाए जाने के बाद उसकी निरंतर पूजन आदि की चिंता जताई। तब भारद्वाज मुनि ने कहा, मां गंगा के रेत का एक कण एक शिवलिंग के बराबर है, इसलिए आप गंगा के रेत से शिवलिंग बनाएं ।

इस प्रकार भगवान श्रीराम ने गंगा की रेत से शिवलिंग बनाकर पूजन किया और उसके बाद पापमुक्त होकर भारद्वाज मुनि का आशीर्वाद प्राप्त किया। भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित इस शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि इसमें एक पुष्प, एक लोटा जल आदि चढ़ाने से एक करोड़ गुना फल प्राप्त होता है ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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