शांगहाई में एक शाम सरोद वादक अमजद अली खान के नाम

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भारत और चीन के बीच बढ़ते सांस्कृतिक संबंधों के तहत पिछले कुछ समय से चीन में भारत के संस्कृति, कला, संगीत से जुड़े लोगों का आना-जाना बढ़ रहा है, जो दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों में मदद कर रहा है।

भारत और चीन के बीच ऐसे ही सांस्कृतिक मेलजोल के तहत शांगहाई में 15 जून को विश्व प्रसिद्ध सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान अपने दोनों बेटों अयान अली और अमान अली के साथ आए, शांगहाई में भारतीय संस्कृति के प्रसार-प्रचार के लिए ‘चैती’ नाम की एक संस्था बहुत सक्रियता के साथ काम कर रही है। चैती द्वारा आयोजित कार्यक्रम ‘चैती कला महोत्सव’ के तहत उस्ताद अमजद अली खान को आमंत्रित किया गया।

शांगहाई में भारतीय काउंसुलेट जनरल अनिल राय की उपस्थिति में दर्शकों से खचाखच भरे ऑडिटोरियम में उस्ताद अमजद अली खान ने कई राग-रागिनियों से लोगों का मन मोह लिया, राग पीलू, राग मालकोस, रवींद्र संगीत, बांग्ला और असमिया संगीत समेत कई अलग-अलग सुर लहरियों के दौरान दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ मधुर संगीत का आनंद उठाया।

इस कार्यक्रम का आयोजन करने के लिए चैती संस्था के लोगों की प्रशंसा करनी होगी, जिन्होंने नि:स्वार्थ भाव से बड़े भव्य स्तर पर सरोद वादन का कार्यक्रम सफलता के साथ आयोजित किया। कोई भी कार्यक्रम बिना प्रायोजक की मदद के बिना मुश्किल होता है, चैती के अथक प्रयासों से बड़ी बड़ी कंपनियों ने आयोजन में अपना योगदान दिया, जिनमें ओयो, सी-ट्रिप, चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस, डॉ. रेड्डी, ह्वावेई, लॉगविन, मसाला आर्ट, एनआईआईटी, सीआईआई समेत कई और प्रायोजक शामिल हैं।

आने वाले दिनों में भारत और चीन के बीच सांस्कृतिक मेलजोल और बढ़ेगा जो दोनों एशियाई पड़ोसियों की तरक्की के साथ आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में अपनी अहम भूमिका निभाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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