इस दिन खुलता है नरक का दरवाजा, बदला लेने आती हैं आत्माएं…

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आज तक हमने नरक के बारे में केवल कहानियों और हमारे बुजुर्गो से ही सुना था । मगर आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि कब नरक का दरवाजा खुलता है और आत्माएं बदला लेने के लिए भी आती है। तो जाइए तैयार ।

बताया जा रहा है कि ‘द घोस्ट फेस्टिवल’ को ‘हंगरी घोस्ट फेस्टिवल’ के नाम से भी जाना जाता है। यह बौद्ध और टोइस्टि धर्म में प्रचलन में है। यह फेस्टीवल चीन में होता है जो कि सातवें महीने के 15वीं रात को होता है। बता दे कि वहां पर इस महीने को भतो का महीना भी कहा जाता है और इसी दिन खुलता है नरक का दरवाजा ।

यहां पर ऐसा माना जाता है कि इस दिन नरक का दरवाजा खुलता है और आत्माएं बदला लेने के लिए आती है। आपको बता दें कि इस त्यौहार को मकसद इतना होता है कि इसके माध्यम से अशांत आत्माओं को शांत किया जा सके ।

बौद्ध और टोइस्टि धर्म में ऐसी आत्माओं को अच्छा नहीं माना गया है। बताया गया है कि इस प्रकार की आत्माएं केवल रात के समय ही अधिक सक्रिय होती है और सांप, कीट, पक्षी, लोमड़ी, भेड़िए एवं शेर का रूप लेती हैं इसके अलावा कई बार ऐसी बुरी आत्माएं सुदंर महिला या पुरूष का रूप लेकर भी अपना बदला पूरा करती है।

आपको बता दें कि वर्तमान में यह फेस्टिवल चीन, जापान, सिंगापुर, मलेशिया, थाइलैंड, श्रीलंका, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, ताइवान और इंडोनेशिया समेत कई एशियाई देशों में मनाया जाता है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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