OMG: इस कब्र में फूल-माला की जगह मारे जाते हैं जूते-चप्पल

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दोस्तों, आज तक आपने सुना होगा कि मुस्लिम लोग अपने पुवर्जो की कब्रों पर जाकर फूल चढाते हैं मगर क्या आपने कभी सुना है कि कहीं पर कब्र हो और वहां पर लोग जाकर फूल माला की जगह पर चप्पल मारते हो, नहीं ना, मगर आज हम आपको एक ऐसी कब्र के बारे में बताने जा रहे हैं जहां पर लोग जाकर चप्पल मारते हैं इतना ही नहीं वहां पर ऐसा करने से उनकी मनोकामना भी पूरी हो जाती हैं ।

आज हम आपको जिस मकबरेें के बारे में बताने जा रहे हैं उसका नाम है चुगलखोर का मकबरा जहां पर लोग अपनी मन्नत पूरी करने के लिए फूल माले की जगह जूते चप्पल मारते हैं । हैरान कर देने वाली 500 साल पुरानी है जो कि आज तक कायम है । इस कब्र को लेकर कई कहानी भी है, जिसके हिसाब से इटावा के बादशाह ने अटेरी के राजा के खिलाफ जंग छेड़ दी थी. जिसके बाद उन्हें पता चला की इस जंग का जिम्मेदार उनका अपना दरबारी जिम्मेदार था ।

​बस फिर क्या था बादशाह ने उसको सजा के तौर पर कहा कि इस शख्स को जूतों-चप्पलों से तब तक पीटा जाए जब तक उसकी मौत ना हो जाए । जिसके बाद से उस दरबारी की मौत के बात से ही यह परम्परा चली आ रही है । जानकारी के लिए बता दें कि तब से वहां रहने वाले लोगों की मानें तो परिवार की शुभ यात्रा के लिए कब्र के पास से गुजरने वाले लोग कम से कम उस कब्र पांच जूते जरूर मारते हैं ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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