ओला ने जारी किया पहला ‘ईज ऑफ मूविंग इंडेक्स’

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शहरों में सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को अधिक मजबूत करने और मोबिलिटी की समग्र स्थिति में सुधार के लिए व्यापक कार्य योजना मुहैया कराने के लिए ओला मोबिलिटी इंस्टीट्यूट ने गुरुवार को भारत का पहला ‘ईज ऑफ मूविंग इंडेक्स, 2018’ जारी किया। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जहाजरानी, जल संसाधन, नदी विकास व गंगा मंत्री नितिन गडकरी ने ‘ईज ऑफ मूविंग इंडेक्स, 2018’ जारी किया। ओला मोबिलिटी इंस्टीट्यूट ओला की एक शोध संस्था है।

इस रिपोर्ट में देश के 20 शहरों के 43 हजार अधिक प्रतिवादियों (उत्तर देने वालों) के सर्वेक्षण का निष्कर्ष है। इन शहरों को परिमाण, चरित्र, संस्कृति, अर्थव्यवस्था और भूगोल के आधार पर चुना गया था।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, “ईज ऑफ मूविंग इंडेक्स शहरों के लिए मोबिलिटी की स्थिति का आकलन करने के लिए एक सराहनीय प्रयास है। इस रिपोर्ट में खासी महत्वपूर्ण जानकारी है, जो सार्वजनिक हितधारकों, शहर प्रशासकों और शहर नियोजकों को प्रदूषण, भीड़भाड़ और सुरक्षा का संज्ञान लेने के लिए बेहतर निर्णय लेने और नागरिकों के लिए बड़े स्तर पर मोबिलिटी में सुधार के लिए त्वरित समाधान निर्मित करने में महत्वपूर्ण मदद प्रदान कर सकती है।”

ओला के सह-संस्थापक और सीईओ भाविश अग्रवाल ने कहा, “मोबिलिटी में क्रांति अभी शुरू हो रही है और हमें विश्वास है कि मोबिलिटी की अर्थव्यवस्था का उद्भव देश के लिए आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए उत्प्रेरक साबित हो सकता है। ईज ऑफ मूविंग इंडेक्स, हमें शहरों और नागरिकों के लिए मोबिलिटी के महत्व का आकलन करने की शुरुआत करने में मदद करता है।”

‘ईज ऑफ मूविंग इंडेक्स 2018’ से प्राप्त मुख्य निष्कर्ष हैं कि 80 फीसदी नागरिक मानते हैं कि परिवहन पारिस्थितिक तंत्र पिछले पांच वर्षों में सुधरा है, 60 फीसदी ने प्रारंभिक और आखिरी गंतव्य की कनेक्टिविटी के तरीकों को बड़े पैमाने वाले परिवहन के साथ एकीकृत करने से बेहतर सुधार होने की बात कही।

रिपोर्ट के मुताबिक, 72 फीसदी उत्तरदाताओं का मानना है कि इस एकीकरण से एक बेहतर सार्वजनिक परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हो सकता है। साथ ही अधिकांश भारतीय इलेक्ट्रिक मोबिलिटी (विद्युतीय गतिशीलता) को अपनाने के इच्छुक हैं और मानते हैं कि विद्युतीकरण परिवहन अनुभाग को नया रूप देगा। वहीं 75 फीसदी का मानना है कि विद्युतीय वाहन 2030 तक पारंपरिक वाहनों का स्थान ले सकते हैं।

इसके अलावा सर्वे के नतीजे बताते हैं कि शहरी मोबिलिटी 55 फीसदी यात्रियों के साथ डिजिटल हो गई है, जो सार्वजनिक परिवहन के स्वामित्व वाले स्मार्ट कार्ड का उपयोग करते हैं। वहीं 40 फीसदी से अधिक यात्री मध्यवर्ती सार्वजनिक परिवहन (इंटरमीडियरी पब्लिक ट्रांसपोर्ट) सहित सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करते समय डिजिटल लेनदेन करते हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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