ऋणशोधन व्यवस्था में 4 लाख करोड़ रुपये एनपीए वापस आया

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सरकार ने बुधवार को कहा कि ऋणशोधन व दिवाला संहिता (आईबीसी)-2016 बनाए जाने से बैंकों के फंसे हुए नौ लाख करोड़ रुपये के कर्ज के आधे से कम की रकम प्रणाली में वापस आ चुकी है। उद्योग संगठन सीआईआई की ओर से करवाए गए एक सम्मेलन में कंपनी मामलों के मंत्रालय में सचिव इंजेती श्रीनिवास ने यह जानकारी दी। इससे एक दिन पहले उनकी अध्यक्षता में ऋणशोधन विधि समिति (आईएलसी) की रिपोर्ट जारी हुई है।

श्रीनिवास ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आईबीसी के तहत समाधान के लिए पिछले साल जून में 12 खातों का जिक्र किया था, जिनमें कुल फंसे हुए कर्ज (एनपीए) की 25 फीसदी थी। उन्होंने आगे कहा कि इन मामलों में अच्छे परिणाम आए हैं, जिससे व्यवस्था में विश्वास बढ़ाने में मदद मिलेगी। अंतिम निर्णायक राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) इस व्यवस्था का एक प्रमुख घटक है।

उन्होंने कहा, “अगर पांच-छह अच्छे नतीजे मिल रहे हैं तो इससे घरेलू और विदेशी निवेशकों का व्यवस्था में विश्वास बढ़ेगा।”

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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