अब प्लास्टिक को खा कर ये कीड़ा देगा स्वच्छ वातावरण

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जयपुर। प्लास्टिक से सारी दुनिया परेशान है लेकिन जो दुनिया इससे परेशान है कि वो इसको इजात करके अपने उपयोग में लाते है।  प्लास्टिक इंसानों की जिंदगी का एक हिस्सा बन गई है जिसके बगैर इनका काम ही नहीं होती है। रोजमर्रा की जिंदगी में प्लास्टिक जितना उपयोगी है इससे ज्यादा कठिन इसको नष्ट करना है। इसकों नष्ट करना बहुत ही मुश्किल काम है। अपकों बता दे कि ये बहुत जल्दी नष्ट नहीं होती है इसकों नष्ट होने में कई सौ वर्ष लग जाते है फिर भी ये नष्ट नहीं होती है। प्लास्टिक जमीन में गड़े रहने के बाद भी नहीं गलता है।

तो इसकी ये सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन इस समस्या से निजात पाने के लिए चीन के वैज्ञानिकों ने ऐसे कीड़े की खोज की है जो प्लास्टिक को खाकर पूरी तरह पचाने में सक्षम है। ये कीड़ा प्लास्टिक को खाकर उसे कार्बन डाईऑक्साइड और अन्य तत्वों में तोड़ देता है। इस अद्भुत कीड़े की खोज बीहांग यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर यांग जुन और शेंझेन स्थित जीनोमिकी संस्थान बीजीआइ के डॉ. झाओ जियाओ ने की है। इसके निरिक्षण में पाया गया कि येलो मीलवॉर्म कहे जाने वाले टेनेब्रियो मॉलिटर कीड़े का लार्वा पॉलीस्टीरीन से क्रिया करने में सक्षम है।

पॉलीस्टीरीन प्लास्टिक का सबसे जटिल स्वरूप का बारे में हैयांग ने बताया कि 2013 में दुनियाभर में प्लास्टिक की खपत 29.9 करोड़ टन रही थी। इसमें से 2.1 करोड़ टन पॉलीस्टीरीन ही था। पॉलीस्टीरीन को चार महीने तक जमीन में गाड़े रखने पर भी यह सिर्फ तीन फीसद ही गल पाता है। ये इसकी सबसे बड़ी समस्या है। कई करोड़ों टन की मात्रा में हर साल कचरे के रूप में फेंकी जाने वाली प्लास्टिक की वस्तुएं पर्यावरण और खाद्य सुरक्षा के लिए कितना बड़ा खतरा है ये अब इंसानों को धीरे धीरे पता चल रहा है। मीलवॉर्म इस दिशा में अब तक का सबसे कारगर कीड़ा माना गया है।

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