अब बच्चों के लिए आ रही है ‘फुकरे’ का एनीमेटेड संस्करण

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बॉलीवुड फिल्म फ्रेंचाइजी ‘फुकरे’ का अब एक एनीमेटेड संस्करण भी आ रहा है जिसका नाम ‘फुकरे बॉयज’ है। डिस्कवरी किड्स पर एनीमेटेड सीरीज को ला रहा है जो बॉलीवुड फिल्म ‘फुकरे’ पर आधारित है। ‘फुकरे बॉयज’ को छह भाषाओं में लॉन्च किया जाएगा – अंग्रेजी, हिंदी, तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़।

एक्सेल एंटरटेनमेंट के सह-संस्थापक रितेश सिधवानी ने कहा, “पहली बार एक्सेल एंटरटेनमेंट ‘फुकरे बॉयज’ के साथ बच्चों के लिए किसी कहानी को बनाने में अपने कदम आगे बढ़ा रहा है। यह हमारे लिए आगे की ओर एक बहुत बड़ा कदम है और इसे बनाना अपने आप में एक उपलब्धि है।”

उन्होंने आगे कहा, “फिल्म की कहानी हनी, चूचा, लाली और भोली पंजाबन के इर्द-गिर्द घूमती है। इसमें पुलकित सम्राट, मंजोत सिंह, अली फजल, वरुण शर्मा, पंकज त्रिपाठी और ऋचा चड्ढा जैसे सितारे हैं। ‘फुकरे’ 2013 में रिलीज हुई थी और इसका दूसरा भाग साल 2017 में आई। तीसरे भाग पर भी काम चल रहा है।” सीरीज का प्रीमियर 12 अक्टूबर को होगा।

 

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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