अब भाजपा लाई ‘दादा के बोलूं’

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तृणमूल कांग्रेस के ‘दीदी के बोलो'(डायल दीदी- ममता बनर्जी) कार्यक्रम को टक्कर देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने अगले महीने अपने राज्य प्रमुख दिलीप घोष को लेकर ‘दादा के बोलूं’ (दादा से कहें) को लॉन्च करने का फैसला किया है। भाजपा के रणनीतिकारों के अनुसार, पार्टी के स्थानीय नेतृत्वकर्ता राज्य के विभिन्न स्थानों पर चाय पार्टियों का आयोजन करेगें, जहां घोष लोगों के बीच जाकर उनकी शिकायतों और सलाह को सुनेंगे।

राज्य में भाजपा पहले ही कार्यक्रम पर एक वीडियो को लॉन्च कर चुकी है। वीडियो में एक पोस्टर भी देखा जा सकता है, जिसमें घोष चाय पीते नजर आ रहे हैं।

‘दीदी के बोलो’ में लोगों को एक हेल्पलाइन नंबर दिया गया है, जिस पर फोन करने पर सबसे पहले तृणमूल स्वयंसेवक फोन उठाते हैं और फिर फोन करने वालों को फोन पर बनर्जी से बात करने के लिए विभिन्न स्तरों से गुजरना पड़ता है। इसके विपरीत, घोष विभिन्न इलाकों में खुद मौजूद होकर लोगों की समस्या सुनेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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