आगासी के बाद अब स्टेपानेक से अलग हुए नोवाक जोकोविक

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सर्बिया के टेनिस खिलाड़ी नोवाक जोकोविक ने बुधवार को अपने कोच चेक गणराज्य के रादेक स्टेपानेक से करार खत्म कर लिया। यह दोनों नवंबर से एक साथ काम कर रहे थे। जोकोविक की आधिकारिक वेबसाइट पर इस बात की पुष्टि की गई है। कुछ दिन पहले ही जोकोविक ने आंद्रे आगासी से आम सहमति से अपनी राहें अलग कर ली थीं। जोकोविक ने हाल ही में अपने खराब फॉर्म के कारण अपने कोचिंग स्टाफ में छटनी की है।

वेबसाइट पर जारी बयान में कहा गया है, “स्टेपानेक के साथ निजी संबंध अच्छे थे और रहेंगे और नोवाक ने उनके साथ काम करने का लुत्फ उठाया है।” बयान के मुताबिक, “वह स्टेपानेक से मिले समर्थन के लिए उनके आभारी रहेंगे।”

बयान में कहा गया कि लंबी चोट से वापसी करने पर उनके आत्मविश्वास और खेल पर असर पड़ा है, लेकिन जोकोविक विजयी फॉर्म को हासिल करने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं।

बयान में कहा गया है, “जोकोविक अपने परिवार के साथ इस समय छुट्टियां मना रहे हैं। वह जल्द ही आने वाले टूर्नामेंट और क्ले कोर्ट पर खेले जाने वाले टूर्नामेंट की तैयारियां शुरू करेंगे।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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