अब सड़क सुरक्षा से रोज बचेगी 400 जानें, जानिए कैसे ?

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भारत में सड़क दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों की संख्या दुनिया में दूसरे नंबर पर है। यहां सड़क दुर्घटना के कारण प्रति वर्ष लगभग 1.5 लाख लोगों की मौत हो जाती है। इस प्रकार, यहां सड़क दुर्घटना के कारण हर घंटे 17 लोगों की मौत हो जाती है। सड़क सुरक्षा उपाय अपनाकर रोज 400 जानें बचाई जा सकती हैं। इसके अलावा हर साल सड़क दुर्घटनाओं में अन्य 5 लाख लोग गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। भारत में सभी गैर-प्राकृतिक आकस्मिक मौतों में से 44 प्रतिशत से अधिक और 18 से 30 वर्ष की आयु के सभी लोगों में से 51 प्रतिशत लोगों की मौत सड़क दुर्घटना के कारण हो जाती है।

सड़क दुर्घटनाओं की चपेट में रोज जान गंवाने वाले लोगों को बचाने के मूल उद्देश्य के साथ अग्रणी उपभोक्ता संरक्षण समूह कंज्यूमर वॉयस ने गुरुवार को ‘सड़क सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता’ बनाने की अपील करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया। इस पहल को 30 साल पुराने मोटर वाहन अधिनियम 1988 पर केंद्रित किया गया जिसके लिए भारत में सड़क सुरक्षा परिदृश्य में जबरदस्त बदलावों के मद्देनजर तत्काल संशोधन की आवश्यकता है।

इस अवसर पर सांसद परवेश वर्मा सड़क दुर्घटना के पीड़ितों और उनके परिवार के सदस्यों, सिविल सोसायटी संगठनों, सांसदों और सड़क सुरक्षा गठबंधन के साझेदार संगठनों ने देश में सड़क सुरक्षा की भयानक स्थिति पर प्रकाश डाला। प्रतिभागियों ने सड़क सुरक्षा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने के लिए प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और प्रधान न्यायाधीश के नाम ज्ञापन पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर किया।

भारत ने ब्रासीलिया घोषणा पर हस्ताक्षर किया है, इस प्रकार यह 2020 तक सड़क दुर्घटना के कारण मौत और चोट को आधा करने के लिए खुद के प्रति और दुनिया के प्रति भी प्रतिबद्ध है।

सांसद परवेश वर्मा ने कहा, “मैं खुद एक दुर्घटना का शिकार हुआ हूं। जैसा कि आपको पता होगा मैंने अपने पिता को एक सड़क दुर्घटना में खो दिया। प्रत्येक और हर जिन्दगी बहुत जरूरी है और हमें सब कुछ करना चाहिए उसे बचाने के लिए। अब प्रस्तावित बिल मोटर व्हीकल अमेंडमेंट बिल इंडिया की सड़को को मजबूत बनाएगा। मैं अब क्रैश विक्टिम्स के साथ मिलकर मोदी जी से अपील करेंगे कि हमारी सड़कों को सुरक्षित किया जाए।”

वर्ष 1988 में भारत की कुल जनसंख्या 83 करोड़ थी और 2017 में यह 132 करोड़ हो गई। 1988 में सड़क दुर्घटना के कारण होने वाली मौत की संख्या 49,218 थी और वर्ष 2017 में सड़क दुर्घटना के कारण होने वाली मौत की संख्या 1,46,377 हो गई। लेकिन सड़क सुरक्षा परिदृश्य में भारी बदलाव के बावजूद अब भी हमारे पास मोटर वाहन अधिनियम, 1988 ही है।”

इस अवसर पर कंज्यूमर वाइस के सीओओ आशिम सान्याल ने कहा, “हर दुर्घटना परिवार और समाज पर एक अविस्मरणीय दर्द छोड़ देती है, लेकिन रोजाना होने वाली दुर्घटनाएं समाज को खराब कर रही हैं और सिर्फ आंकड़ों को कम कर रही हैं। इसलिए हमने अपनी अपील में शामिल होने के लिए साहिब सिंह वर्मा की सड़क दुर्घटना की मौत के बाद खुद को पीड़ित मानने वाले सांसद परवेश वर्मा सहित भयानक सड़क दुर्घटना से जीवित लोगों और उनके परिवारों को अपनी कहानियां बताने के लिए आमंत्रित किया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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