DU की एक्जीक्यूटिव काउंसिल के लिए नामांकन दाखिल

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दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) ने बृहस्पतिवार को रजिस्ट्रार ऑफिस में अपने शिक्षक साथियों के साथ दिल्ली विश्वविद्यालय की कार्यकारी परिषद (ईसी) और अकादमिक परिषद (एसी) के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया। दिल्ली विश्वविद्यालय में महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाली सबसे अहम इन संस्थाओं के चुनाव आगामी 12 फरवरी को होने हैं। दिल्ली टीचर्स एसोसिएशन (डीटीए) द्वारा एसी और ईसी चुनाव में नामांकन दाखिल करते समय उनके साथ डीयू के विभिन्न विभागों व कॉलेजों के 50 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया।

डीटीए के प्रभारी डॉ. हंसराज सुमन ने कहा, “जीतने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता एडहॉक शिक्षकों का समायोजन, स्थायीकरण कराना है।” उन्होंने चिंता जताई कि पिछले एक दशक से ज्यादा से स्थायी नियुक्ति न होने से हर महीने एडहॉक शिक्षकों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। जहां पहले एडहॉक शिक्षकों की संख्या 4500 थीं आज लगभग 6 हजार हो गई है।

डॉ. सुमन ने कहा कि उनके एजेंडे में एडहॉक शिक्षकों का समायोजन और स्थायीकरण के अलावा शिक्षकों की टाइम बाउंड पदोन्नति ,महिला शिक्षिकाओं को मातृत्व अवकाश ,बिना पीएचडी शिक्षकों को एसोसिएट प्रोफेसर बनाना, 5 दिसम्बर 2019 का शिक्षा मंत्रालय के सकरुलर को लागू कराना, पुरानी पेंशन की वापसी कराना, ओबीसी कोटे की सेकेंड ट्रांच के पदों को जल्द भरवाना, शिक्षकों से की जा रही रिकवरी पर रोक, कॉलेजों में प्रोफेसर के प्रमोशन शुरू करना है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

 

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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