No Smoking Day: स्मोकर के कारण नॉन स्मोकर्स भी हो रहे हैं गंभीर बीमारियों का शिकार!

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धूर्मपान करना सेहत के लिए हानिकारक है….यह कहावत काफी बार सुनी, देखी और पढी जाती है। लेकिन शायद ही बहुत कम लोग होंगे जो इस पर अमल करते होंगे। भारत में धूम्रपान की हानियों को समझाने के लिए ना जाने कितने ही प्रयासों को अंजाम दिया गया, जिसमें से मूवीज के शुरुआत में दिखाई जाने वाली मुकेश की कहानी और टीवी पर दिखाए जाने वाले एडवरटाइजमेंट भी शामिल हैं। इसके बावजूद स्मॉकिंग का क्रेज बढता ही जा रहा है। इसका प्रभाव स्मॉकर्स पर तो पडता ही है, लेकिन नॉन समॉकर्स भी इससे प्रभावित हो रहे हैं। बता दें कि, बच्चों को समॉकिंग से सबसे ज्यादा खतरा होता है क्योंकि इस खराब आदत के कारण इनके नाजुक फेफड़े और अंग कम उम्र में ही बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं।

धूम्रपान पडेगा मंहगा

धूम्रपान का मतलब सिर्फ सिगरेट और बीडी पीने से ही नहीं है अपितु तम्बाकू युक्त पदार्थ, सिगार और पाइप भी इनिहीम में शामिल हैं जो आपके शरीर को बीमार और बहुत बीमार करने के लए काफी होते हैं। शोध में पाया गया है कि, तम्बाकू 4000 केमिकल कंपाउंड से भरपूर होता है जिसमें मौजूद 250 केमिकल्स आपके लिए जानलेवा साबित हो सकता है। जिसके कारण आपको कैंसर जैसी कई खतरनाक बीमारियों से जूझना पड जाता है।

बच्चों को खतरा

बच्चों के फेफड़े और अन्य शारिरिक अंग बहुत नाजुक और संवेदनशील होते हैं जिन पर प्रदूषण, धुंए या धूम्रपान का सीधा प्रभाव पडता है। उन बच्चों पर इसका ज्यादा प्रभाव पडता है जिनके माता-पिता या करीबी धूम्रपान करते हों। लेकिन बता दें कि, अगर इस आदत से जल्द बचाव ना किया जाए तो बच्चों में कैंसर, शुगर, सांस संबंधी कई समस्याओं की संभावनाएं विकसित हो जाती है।

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गर्भवस्था में घातक

गर्भावस्था में धूम्रपान करना या फिर उसके धुएं को अप्रत्यक्ष रूप से ग्रहण करना मां और उसके बच्चे के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। धूम्रपान का धुआं ग्रहण करने से SIDS (सडेन इंफैंट डेथ सिन्ड्रोम) की संभावनाएं विकसित हो जाती हैं जिसके कारण बच्चे की पेट में ही मृत्यु हो सकती है। इसके कारण प्री-मेच्योर डिलिवरी, बच्चे का वजन सामान्य से कम, बच्चे की मानसिक क्षमता सामान्य से कम, और उसके सोचने और समझने की क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

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हृदय रोग को बढावा

विशेषज्ञों का मानना है कि, पैसिव स्मोकिंग या फिर सेकंड हैंड स्मोकिंग से हृदय रोग का खतरा बढ जाता है। दरअशल, धूम्रपान का धु्ंआ आपके कार्डियोवस्कुलर सिस्टम को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। धूम्रपान का धुंआ रक्त धमनियों में कार्टिसोल का जमाव करना शुरु कर देता है जिसके कारण उनके ब्लॉक होने का खतरा बढ जाता है। इतना ही नहीं, इसके कारण आपके शरीर में हार्ट अटैक, हार्ट ब्लॉक और गंभीर स्ट्रोक का खतरा भी पैदा होता है।

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अस्थमा की संभावना

जाहिर है कि, धूम्रपान का धुंआ मुंह के जरिए फैंफडों में पहुचता है जिसके कारण अस्थमा की समस्या उत्पन्न हो जाती और कभी-कभी अस्थमा अटैक जैसी जानलेवा समस्याओं का सामना भी करना पड सकता है। दरअसल, आपकी श्वसन नली में छोटे-छोटे रोंए जैसी ही एक संरचना मौजूद होती है। सिलिया नामक यह संरचना धूल और म्यूकस को रोकने का कार्य करती है। ज्यादा स्मोकिंग करने के कारण सिलिया पर नोटी परत जम जाती है जिसके कारण आपके फेफड़ों को हानि का सामना करना पड सकता है।

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कैंसर के कारण जानलेवा

धूम्रपान को कैंसर जैसी समस्याओं का जनक माना जाता है, इसी के कारण आनुवांशिक कैंसर की समस्या भी हो सकती है। धूम्रपान का सेवन ना सिर्फ फैंफडों का कैंसर बनाता है बल्कि कैंसर के खतरें को 30 प्रतिशत कर बढा देता है। इसके अलावा, इंफैक्शन होना भी आम समस्या बनती जा रही है।

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