मध्य प्रदेश के 8 जिलों में अब तक सामान्य बारिश नहीं

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मध्यप्रदेश में सक्रिय मानसून ने राज्य को बड़े हिस्से को तर-बतर कर दिया है, वहीं आठ जिले ऐसे हैं जहां अभी तक सामान्य बारिश नहीं हुई है। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष मानसून में एक जून से 7 सितंबर तक आठ जिलों में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक वर्षा दर्ज की गई है। प्रदेश के 35 जिलों में सामान्य वर्षा दर्ज हुई है। वहीं आठ जिलों में अभी तक सामान्य बारिश नहीं हुई है।

राज्य के आठ जिलों- टीकमगढ़, उमरिया, भिंड, दतिया, शिवपुरी, नीमच, मुरैना और सिंगरौली में औसत से 20 प्रतिशत अधिक बारिश हुई।

सामान्य वर्षा 38 जिलों- अशोकनगर, शहडोल, खंडवा, बुरहानपुर, बड़वानी, जबलपुर, सीधी, ग्वालियर, रतलाम, मंदसौर, झाबुआ, श्योपुरकलां, रायसेन, कटनी, इंदौर, रीवा, दमोह, खरगोन, छतरपुर, गुना, मंडला, विदिशा, शाजापुर, सीहोर, उज्जैन, आगर-मालवा, नरसिंहपुर, पन्ना, भोपाल, राजगढ़, होशंगाबाद, सिवनी, सतना, डिंडोरी और सागर में हुई है।

इसके अलावा धार, हरदा, बालाघाट, छिदवाड़ा, अनूपपुर, देवास, अलीराजपुर और बैतूल वे जिले हैं, जहां औसत बारिश अभी तक दर्ज नहीं हुई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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