किसी और को नहीं अपने आप को साबित करना था : रविंद्र जडेजा

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हरफनमौला खिलाड़ी रवींद्र जडेजा ने वेस्टइंडीज के खिलाफ अंत तक क्रीज पर टिक कर भारत को तीसरे और निर्णायक वनडे मैच में जीत दिलाई जिसके दम पर मेजबान टीम सीरीज जीतने में सफल रही। मैच के बाद उन्होंने कहा कि वह जब भी मैदान पर कदम रखते हैं तो सिर्फ अपना सर्वश्रेष्ठ करना चाहते हैं और टीम की जीत में अहम योगदान निभाना चाहते हैं। यहां बाराबती स्टेडियम में रविवार को खेले गए तीसरे वनडे में विंडीज ने भारत को 316 रनों का लक्ष्य दिया था जिसे भारत ने हासिल कर लिया और चार विकेट से मैच जीत सीरीज 2-1 से अपने नाम की।

मैच के बाद जडेजा ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “मुझे जब भी मौका मिलता है तो मैं अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करता हूं। मैं अपने आप को साबित करना चाहता हूं कि मैं अभी भी सीमित ओवरों की क्रिकेट खेलने में सफल हूं। मुझे विश्व में किसी और को साबित नहीं करना। मैं कोशिश करता हूं कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ दे सकूं चाहे वो फील्डिंग में हो, गेंदबाजी में हो या बल्लेबाजी में।”

जडेजा ने इस मैच में गेंदबाजी में भी योगदान दिया। उन्होंने 10 ओवरों में 54 रन बनाकर एक विकेट निकाला। उन्होंने टीम को पहली सफलता दिलाई थी।

बाएं हाथ के इस खिलाड़ी ने कहा, “हम बीच में तीन विकेट खो चुके थे और वनडे क्रिकेट में यह होता है। एक बार जब आपको सलामी बल्लेबाज अच्छी शुरुआत देते हैं तो ऐसा हो सकता है कि मध्य क्रम सस्ते में निपट ले। हम जानते थे कि विकेट अच्छा है और हम लक्ष्य का पीछा कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि मैंने जो पारी खेली वो काफी अहम थी। यह सीरीज का निर्णायक मैच था। जब मैं क्रीज पर आया, मैं विराट के साथ खड़े होने की कोशिश कर रहा था। बल्लेबाजी के लिहाज से विकेट काफी अच्छी थी। गेंद के हिसाब से खेलना इस विकेट पर बनता था।”

कप्तान कोहली के साथ अपनी साझेदारी पर जडेजा ने कहा, “विराट और मैं बात कर रहे थे कि विकेट अच्छी है। उन्होंने मुझसे कहा था कि विकेट पर खड़े रहना क्योंकि वह मैच खत्म करना चाहते हैं। दुर्भाग्यवश वह आउट हो गए और इसके बाद उन्होंने मुझसे अपना स्वाभाविक खेल खेलने को कहा और बचकाना गलतियां करने को मना किया।”

उन्होंने कहा, “विराट जब आउट हो गए तब मैं अपने आप से कह रहा था कि मुझे अंतिम गेंद तक खेलना है। जब शार्दूल आया, मैंने उससे कहा की ठीक से बल्लेबाजी करना और खराब शॉट नहीं खेलना। विकेट अच्छी है और गेंद अच्छे से बल्ले पर आ रही है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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