अभिनेत्री बनने का कोई इरादा नहीं : सोनम नायर

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करण जौहर की ‘कपूर एंड सन्स’ में अभिनय कर चुकीं और ‘गिप्पी’ की निर्देशक सोनम नायर का कहना है कि उन्हें अभिनय करना पसंद है लेकिन उनका अभिनेत्री बनने का कोई इरादा नहीं है। सोनम ने आईएएनएस को बताया, “मेरी इच्छा है कि लोग मुझे कास्ट करें। लेकिन मेरा अभिनेत्री बनने का कोई इरादा नहीं है। जब मैं निर्देशन करती हूं तो मैं प्रत्येक किरदार को निभाती हूं..लाइंस बोलती हूं और अगर मैंने संवाद लिखे हैं तो मुझे पता है कि इनके क्या मतलब हैं। मैं एक व्यक्ति के रूप में बहुत नाटकीय हूं।”

उन्होंने कहा, “मुझे अभिनय पसंद है लेकिन मैंने अभिनेत्री बनने के लिए कुछ नहीं किया। मैं फिल्म उद्योग में हूं। मेरे बहुत सारे मित्र हैं जो निर्देशक हैं। जब मैं उनके सेट पर जाती हूं तो वह मुझसे लाइंस बोलने के लिए कहते हैं। उन्हें पता है कि मुझे ऐसा करने से खुशी मिलती है।”

सोनम को फिलहाल ‘द ट्रिप 2’ के लिए सराहना मिल रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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