किसी भी देश को हांगकांग मामले में दखल देने की इजाजत नहीं : चीन

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चीन ने कहा कि हांगकांग मामला चीन का आंतरिक मामला है। किसी भी देश को हांगकांग मामले में दखल देने की इजाजत नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लू खांग ने गुरुवार को प्रेस सम्मेलन में कहा, “हम किसी भी देश और संगठन को हांगकांग मामलों में दखल देने की इजाजत नहीं देते, उसका कड़ा विरोध करते हैं।”

रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश प्रधानमंत्री थेरेसा मे ने दिए अपने भाषण में कहा कि उन्हें आशा है कि ब्रिटेन और चीन के बीच अच्छे आर्थिक संबंध बरकरार रहेंगे। वह चीन और ब्रिटेन के बीच समस्याओं पर अपना रुख प्रकट करेंगी।

इस पर लू खांग ने कहा कि चीन और ब्रिटेन के बीच अच्छे संबंध जारी रखने में दोनों देशों के नेताओं के बीच आम सहमति है। अगर दोनों इस सहमति के आधार पर एक साथ चीन-ब्रिटेन संबंध को आगे बढ़ाएंगे, तो दोनों देशों के जनता के लिए लाभदायक रहेगा।

उन्होंने कहा कि 1 जुलाई 1997 को हांगकांग के चीन में वापस आने के बाद हांगकांग मामला चीन का आंतरिक मामला है। हम चीन के संविधान और हांगकांग के मूल कानून के आधार पर हांगकांग पर शासन करते हैं। ब्रिटेन का हांगकांग पर शासन करने का अधिकार नहीं है।

चीन किसी भी देश और संगठन को हांगकांग मामलों में दखल देने की इजाजत नहीं देता और उसका कड़ा विरोध करता है।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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