पिछले 46 सालों में समान नागरिक संहिता की कोई कोशिश नहीं हुई : सर्वोच्च न्यायालय

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सर्वोच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि संविधान निर्माताओं को आशा और उम्मीद थी कि राज्य पूरे भारतीय सीमा क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित कराने की कोशिश करेगा, लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सर्वोच्च न्यायालय ने गोवा के मामले का जिक्र करते हुए कहा, “जिन मुस्लिम पुरुषों की शादियां गोवा में पंजीकृत हैं, वे बहुविवाह नहीं कर सकते। इसके अलावा इस्लाम के अनुयायियों के लिए भी मौखिक तलाक का कोई प्रावधान नहीं है।”

न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने एक फैसले में समान नागरिक संहिता का एक संदर्भ देते हुए कहा, “यद्यपि हिंदू कानून को वर्ष 1956 में संहिताबद्ध किया गया, लेकिन देश के सभी नागरिकों पर लागू एक समान नागरिक संहिता बनाने की कोई कोशिश नहीं की गई है।”

अदालत ने गोवा को एक चमकता उदाहरण बताया, जहां सभी के लिए एक समान नागरिक संहिता लागू है, चाहे वह किसी भी धर्म का हो।

अदालत ने ये बातें जोस पाउलो कौटिन्हो बनाम मारिया लुजिया वैलेंसिया परेरा के बीच एक सिविल मुकदमे में कही।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस


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