जापान के फुटबाल कोच पद से इस्तीफा देंगे निशिनो

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जापान फुटबाल एसोसिएशन (जेएफए) का कहना है कि राष्ट्रीय फुटबाल टीम के कोच अकिरा निशिनो इस महीने के आखिर में अपने पद से इस्तीफा दे देंगे। जेएफए के अध्यक्ष कोजो टाशिमा ने राष्ट्रीय टीम के रूस में जारी फीफा विश्व कप में हिस्सा लेकर स्वदेश लौटने के बाद गुरुवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा,”हमने निशिनो से अपने काम पर बने रहने के लिए नहीं कहा है लेकिन हमें उम्मीद है कि अन्य तरह से वह जापान फुटबाल के विकास में अपना योगदान देते रहेंगे।”

निशिनो संवाददाता सम्मेलन के दौरान मौजूद थे। उन्होंने अपनी टीम को धन्यवाद दिया। कोच ने कहा कि टीम 2022 में कतर में होने वाले विश्व कप में क्वालिफाई करेगी और आठ साल में एक बार विश्व कप में क्वालिफाई करने के द्वंद्व को तोड़ेगी।

निशिनो के मार्गदर्शन में टीम ने इस बार रूस में जारी फीफा विश्व कप के अंतिम-16 में प्रवेश किया था। लेकिन टीम को बेल्जियम से 2-3 से हारकर बाहर होना पड़ा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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