Nirmali-Saraigarh rail खंड जल्द शुरू होगा

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मिथिलांचल क्षेत्र में निर्मली और सरायगढ़ के बीच रेल खंड 87 वर्षो के बाद अब जल्द ही शुरू होने की संभावना है। ट्रायल रन के दौरान रविवार को एक रेलवे इंजन निर्मली पहुंचा और अधिकारी कुछ दिनों में भारत रेलवे की सुरक्षा और तकनीकी प्राधिकरण से अनुमति प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।

1934 में मिथिलांचल में भूकंप आने के बाद निर्मली से सरायगढ़ के बीच का रेलवे खंड निलंबित कर दिया गया, जिसने मीटर गेज रेलवे लाइन को नष्ट कर दिया, जो दो स्थानों से जुड़ा था।

निर्मली तक इंजन पहुंचने के बाद, स्थानीय निवासियों ने प्रार्थना का आयोजन किया और पारंपरिक शैली में इसका स्वागत किया।

रेल और सड़क के लिए कोसी महासेतु का निर्माण भी पूरा हो गया है और आम जनता के लिए इसे चालू किया गया है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कोसी नदी पर एक रेलवे पुल के निर्माण की आधारशिला रखी और इसे कोसी महासेतु का नाम दिया।

न्यूज सत्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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