Covid-19 से पीड़ितों की सहायता के लिए नौवां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन

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कोविड-19 महामारी से दुनिया भर में अपार क्षति हुई है। इस संक्रमण ने 215 देशों, क्षेत्रों व इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया है। अपने यहां शरणार्थियों को रखने वाले 134 देशों में स्थानीय संचरण के मामले दर्ज किए गए हैं। इस महामारी में कई लोगों ने अपनी नौकरी खो दी है। रोजगार के अभाव में, बीमारी के चलते परिवारों में सदस्यों के बीच भी तनाव का माहौल है।

महामारी के इस दौर में मानसिक स्वास्थ्य को ठीक रखने की बात को ध्यान में रखते हुए पीड़ितों की सहायता पर आधारित नौवें अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का 30 से 31 अक्टूबर के बीच आयोजन किया जा रहा है। कॉन्फ्रेंस में इस बार की थीम होगी ‘विक्टिम असिस्टेंट : चैलेंजेस एंड रेजिलिएंस ड्युरिंग कोविड-19।’

सम्मेलन में तमाम क्षेत्रों से संबंधित विशेषज्ञ और पेशेवर विभिन्न ऐसी समस्याओं और मुद्दों पर अपने विचार रखेंगे, जिसका सामना विभिन्न पेशों से जुड़े लोग इस वक्त कर रहे हैं। इसमें अध्ययन क्षेत्र, आपराधिक न्याय प्रणाली, कानून प्रवर्तन एजेंसियां, चिकित्सा पेशे से जुड़े लोग, गैर-सरकारी संगठन सहित कई अन्यों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर भी गौर फरमाया जाएगा।

जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेस के प्रधान निदेशक संजीव पी. साहनी ने कहा, “यह सम्मेलन विभिन्न सरकारी अधिकारियों, वकीलों, न्यायाधीशों, चिकित्सा पेशेवरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मीडिया कर्मियों, नीति निमार्ताओं, मनोवैज्ञानिकों, समाजशास्त्रियों, अपराधविदों, आहतशास्त्रियों और दुनिया भर के विद्यार्थियों को आपस में जुड़ने के माध्यम से ज्ञान का आदान-प्रदान करने हेतु एक खुला मंच प्रदान करता है।”

स्वयं एक मशहूर व्यवहार विशेषज्ञ और सेंटर फॉर विक्टिमोलॉजी एंड साइकोलॉजिकल स्टडीज (सीवीपीएस) के निदेशक साहनी ने इस कठिन घड़ी में पीड़ितों की सहायता किए जाने की आवश्यकता पर जोर दिया और साथ ही समाज के विभिन्न स्तरों में व्याप्त अन्याय, आघात, उत्पीड़न का सामना करने के लिए सामूहिक प्रयास की भावना को भी प्रोत्साहित किया।

उन्होंने कहा, “इस वक्त आयोजित यह सम्मेलन दुनिया भर के शोधकर्ताओं के लिए एक साथ आने और पीड़ितों की सहायता करने के लिए विभिन्न विचारों और रूपरेखाओं पर चिंतन करने का एक उत्कृष्ट अवसर प्रदान करता है।”

सम्मेलन को कई प्रख्यात मनोवैज्ञानिकों, आहतशास्त्रियों और अपराधविदों द्वारा संबोधित किया जाएगा।

सम्मेलन का आयोजन सेंटर फॉर विक्टिमोलॉजी एंड साइकोलॉजिकल स्टडीज (सीवीपीएस), जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ बिहेवियरल साइंसेज (जीआईबीएस), ओ. पी. जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी द्वारा किया जा रहा है।

सम्मेलन में दुनिया भर के 25 से अधिक देशों के 1,000 से अधिक विद्वान भाग लेंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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