एनएचएआई ने कहा, सड़कों के हाल की कड़ी निगरानी हो 

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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों/परियोजना निदेशकों से सड़कों की स्थिति की कड़ी निगरानी करने और सड़कों के क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने के लिए समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। एनएचएआई के अध्यक्ष दीपक कुमार ने सभी क्षेत्रीय अधिकारियों/परियोजना निदेशकों से सड़कों की स्थिति की कड़ी निगरानी करने और सड़कों के क्षतिग्रस्त हिस्सों को दुरुस्त करने के लिए संबंधित रियायत प्राप्तकर्ताओं/ठेकेदारों के जरिए समय पर आवश्यक कदम उठाने को कहा है, बशर्ते कि एनएचएआई की वर्तमान नीति के अनुसार ये हिस्से उनके या चयनित एजेंसी के दायरे में आते हों।

उन्होंने यह निर्देश दिया है कि “यदि संबंधित रियायत प्राप्तकर्ता/ठेकेदार अपने अनुबंधित ओएंडएम (परिचालन एवं प्रबंधन) दायित्वों को पूरा करने में विफल रहता है, तो संबंधित समझौतों के अनुसार उपयुक्त हर्जाना वसूला जाना चाहिए और उन हिस्सों के रख-रखाव के लिए शीघ्र ही आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए।”

इसके साथ ही उन्होंने विशेष जोर देते हुए कहा है कि यदि स्वतंत्र अभियंता की ओर से कोई ढिलाई बरती जाती है, तो उसके खिलाफ समुचित कार्रवाई की जाएगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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