गंगा में एक बूंद प्रदूषण भी चिंता का विषय है: एनजीटी

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जयपुर। जस्टिस आदर्श कुमार गोयल की अध्यक्षता वाली एनजीटी की पीठ ने उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को गंगा उसकी सहायक नदियों में गंगा नदी में गंदा पानी या उद्योगिक अपशिष्ट डालने पर प्रतिबंध करने के निर्देश दिए हैं बताया जा रहा है कि पीठ ने आकर किया है कि कार्रवाई करने में विफल रहने पर नदी में अपशिष्ट का गंदा पानी छोड़ने के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों या अधिकारियों से मुआवजा भी वसूल कर आ जाएगा.

आपको बता दें कि इस मामले को लेकर पीठ ने कहा है कि यह मुआवजा नसीहत देने वाला और पुरानी स्थिति बहाल करने की कीमत वसूल करने के लिए पर्याप्त होना चाहिए इसके अलावा ने कहा कि ऐसा करने के लिए जरूरी है कि गंगा नदी को प्रदूषित करना फायदेमंद सौदा नहीं रहा है.

इसी मामले को लेकर एक अधिकारी ने कहा है कि उत्तराखंड राज्य को सुनिश्चित करना होगा की गंगा और उसकी सहायक नदियों के तट पर अवैध रूप से शिविर लगाकर कोई ना ठहरे और नीलकंठ महादेव की और पौड़ी गढ़वाल जिले की पानी का में कथित अवैध कैंपिंग का विशेष उल्लेख किया गया है और इसे रोकने की मांग की गई है.

आपको बता दें कि इस मामले को लेकर एनजीटी ने कहा है कि उसके जरिए गंगा की सफाई को लेकर 10 दिसंबर 2015 को दिए गए निर्देशों की पालना सख्त रूप से करी जानी चाहिए.

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