नई माताएं ऐसे बच पाएंगी लंच बॉक्स सिंड्रोम से, जानिए इसके बारे में !

0
142

माताएं अक्सर अपने बच्चों के खाना नहीं खाने की शिकायत करती हैं। कई माताएं अक्सर कहती हैं कि उनका बच्चा लंच बॉक्स का खाना पूरी तरह से खत्म नहीं करता है। उन्हें इसके लिए काफी कोशिश करनी होती है कि बच्चे पूरा खाने में रुचि लें। ऐसे में माताएं हर सुबह जल्दी उठ जाती हैं और पशोपेश में रहती हैं कि वे अपने बच्चों को नाश्ते व भोजन में कौन सी चीजें दें।

पोषण विशेषज्ञ और न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कुमुद खन्ना कहती हैं, “कामकाजी माताएं खासकर एक गलती करती हैं और वह है पिछले दिन के डिनर का खाना लंच बाक्स में नए अवतार में पैक करना। लेकिन बच्चे स्मार्ट होते हैं। वे इसे नकार देते हैं। विभिन्न तरीके से स्वस्थ लंच बाक्स के विकल्प को देते रहना महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे वही खाना सीखते हैं जिनसे वे वाकिफ हैं। इसलिए किसी तरह के अनोखे व्यंजन परोसने की कोशिश न करें।”

कुमुद खन्ना कहती है कि बच्चों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। यह शरीर के विकास के लिए काफी फायदेमंद है। इस तरह से प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट की उचित मात्रा खाने में शामिल होनी चाहिए। खाना दिखने में भी बच्चे को पसंद आए इसका भी ख्याल रखें। इस तरह से दूध से बने उत्पाद व हरी सब्जियां उनके खाने का हिस्सा होनी चाहिए।

बढ़ते बच्चों को मुख्य रूप से प्रोटीन और ऊर्जा की जरूरत होती है। थोड़ा बहुत वसा भी उनके दिमाग के लिए आश्चर्यजनक ढंग से काम कर सकता है। इसलिए अपने बच्चे के लंच बाक्स में फल, सब्जियां और थोड़ा बहुत स्वास्थ्यवर्धक ऑॅयल शामिल करें।

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियटी हॉस्पिटल की न्यूट्रिशियन पायल शर्मा कहती हैं कि आप बच्चे को चुनने और खुद से अपना लंच तैयार करने में मदद के लिए भी प्रोत्साहित कर सकती हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें शामिल करें ताकि उन्हें यह एहसास न हो कि जो चीजें उन्हें पसंद नहीं है उन्हें जबरदस्ती वे चीजें खिलाई जा रही हैं। बच्चों को अपने खाने की सूची बनाने को लेकर भी प्रोत्साहित करें।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleसुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों की सरकार को लगाई फटकार
Next articleतुफान से भी तेज है इन कारों की स्पीड, अब तक इनके नाम दर्ज है कई रिकॉर्ड
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here