नई माताएं ऐसे बच पाएंगी लंच बॉक्स सिंड्रोम से, जानिए इसके बारे में !

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माताएं अक्सर अपने बच्चों के खाना नहीं खाने की शिकायत करती हैं। कई माताएं अक्सर कहती हैं कि उनका बच्चा लंच बॉक्स का खाना पूरी तरह से खत्म नहीं करता है। उन्हें इसके लिए काफी कोशिश करनी होती है कि बच्चे पूरा खाने में रुचि लें। ऐसे में माताएं हर सुबह जल्दी उठ जाती हैं और पशोपेश में रहती हैं कि वे अपने बच्चों को नाश्ते व भोजन में कौन सी चीजें दें।

पोषण विशेषज्ञ और न्यूट्रिशन सोसाइटी ऑफ इंडिया की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ कुमुद खन्ना कहती हैं, “कामकाजी माताएं खासकर एक गलती करती हैं और वह है पिछले दिन के डिनर का खाना लंच बाक्स में नए अवतार में पैक करना। लेकिन बच्चे स्मार्ट होते हैं। वे इसे नकार देते हैं। विभिन्न तरीके से स्वस्थ लंच बाक्स के विकल्प को देते रहना महत्वपूर्ण है क्योंकि बच्चे वही खाना सीखते हैं जिनसे वे वाकिफ हैं। इसलिए किसी तरह के अनोखे व्यंजन परोसने की कोशिश न करें।”

कुमुद खन्ना कहती है कि बच्चों के लिए प्रोटीन बहुत जरूरी है। यह शरीर के विकास के लिए काफी फायदेमंद है। इस तरह से प्रोटीन व कार्बोहाइड्रेट की उचित मात्रा खाने में शामिल होनी चाहिए। खाना दिखने में भी बच्चे को पसंद आए इसका भी ख्याल रखें। इस तरह से दूध से बने उत्पाद व हरी सब्जियां उनके खाने का हिस्सा होनी चाहिए।

बढ़ते बच्चों को मुख्य रूप से प्रोटीन और ऊर्जा की जरूरत होती है। थोड़ा बहुत वसा भी उनके दिमाग के लिए आश्चर्यजनक ढंग से काम कर सकता है। इसलिए अपने बच्चे के लंच बाक्स में फल, सब्जियां और थोड़ा बहुत स्वास्थ्यवर्धक ऑॅयल शामिल करें।

धर्मशिला नारायणा सुपरस्पेशियटी हॉस्पिटल की न्यूट्रिशियन पायल शर्मा कहती हैं कि आप बच्चे को चुनने और खुद से अपना लंच तैयार करने में मदद के लिए भी प्रोत्साहित कर सकती हैं। इस प्रक्रिया में उन्हें शामिल करें ताकि उन्हें यह एहसास न हो कि जो चीजें उन्हें पसंद नहीं है उन्हें जबरदस्ती वे चीजें खिलाई जा रही हैं। बच्चों को अपने खाने की सूची बनाने को लेकर भी प्रोत्साहित करें।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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