एंटीबायोटिक की दुनिया में पिछले 30 वर्षों के बाद पहला ऐसा आविष्कार किया गया

एंटीबायोटिक की दुनिया में पिछले 30 वर्षों के बाद पहला ऐसा आविष्कार किया गया टेक्सियोवैक्टिन नामक दवा पर आधारित अन्य दवाइयों को विकसित किया जा रहा है

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जयपुर। भारतीय प्रतिभा पहचान की मोहताज नही है। वह किसी भी देश में रहकर भी अपनी अद्भुत मेधावी क्षमता का परिचय दे सकती हैं। इसी कड़ी में भारतीय मूल के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी दवाई विकसित कर ली है जो तीस साल बाद एंटीबायोटिक के इतिहास में नई क्रांति लेकर आएगी। जी हां, यह दवाई चिकित्सा जगत में नई संभावनाओं को जन्म देगी। टेक्सियोबैक्टिन नामक यह एंटीबायोटिक पिछले तीस सालो में खोजी गई सबसे अनोखी दवाई हैं।

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शोधकर्ताओं का दावा हैं कि यह दवा पूरी तरह से बैक्टीरिया को मूल सहित नष्ट कर देगी। हाल ही में वैज्ञानिकों ने इसका सफल परीक्षण भी कर लिया है। इस नई दवा की खोज ने उम्मीद की नई किरण को पैदा किया हैं। दुनिया भर में कई बीमारियों से जंग लड़ रहे रोगियों के लिए यह दवाई संजीवनी बूटी साबित होगी। आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस नई दवा की मदद से वो सारे जीवाणु मारे जा सकेंगे जो अब तक बच जाया करते थे।

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एंटीबायोटिक की दुनिया में पिछले तीस वर्षों के बाद यह पहला ऐसा आविष्कार है जो इतिहास बदलने की महान क्षमता रखता है। फिलहाल टेक्सियोबैक्टिन के व्यापारिक उत्पादन की तैयारियां चल रही है। टेक्सियोवैक्टिन नामक दवा की मदद से कई रोगों से लड़ने मे मदद मिल पाएगी। साल 2015 में पहली बार मिट्टी पर इसके सैंपल जमा किए गए थे। अब इस दवाई को लैब में विकसित कर लिया गया है।

इंग्लैड के लिंकन विश्वविद्यालय में बतौर वैज्ञानिक अनुसंधान कर रहे भारतीय मूल के ईश्वर सिंह और सेरी के लक्ष्मीनारायण राजामणि ने यह अनोखी दवा बनाई है। दवा को लैब में तैयार करने के बाद कुछ जरूरी सुधार किया गया। इसके बाद चूहों पर इसका कामयाब परीक्षण किया गया। फिलहाल यह दवाई अपने व्यावसायिक उत्पादन की प्रक्रिया के विभिन्न चरणों से गुज़र रही है। जल्द ही यह बाजार में उपलब्ध हो सकेगी।

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