Nepal PM ने आतंकवाद पर व्यापक सहमति का आह्वान किया

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नेपाल के प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली ने शुक्रवार को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सहमति (सीसीआईटी) अपनाने का आह्वान किया।

संयुक्त राष्ट्र की एक उच्च-स्तरीय बैठक में उन्होंने कहा, नेपाल अतंकवाद को किसी भी रूप में, और इस तरह की कोई गतिविधि जिसमें आम निर्दोष नागरिकों को चोट देती हो, की कड़ी आलोचना करता है। हम अतंकवाद पर जल्द एक व्यापक सहमति चाहते हैं।

सीसीआईटी का प्रस्ताव भारत ने ही 1996 में रखा था, लेकिन इसको परिभाषित करने के मुद्दे पर मतभेद उभर आए, जिसके बाद ये आगे नहीं बढ़ सका।

पहले से रिक ॉर्डेड भााषण में, ओली ने भारत या चीन या क्षेत्रीय मुद्दों का उल्लेख नहीं किया, लेकिन कहा, काठमांडू अपने पड़ोसियों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध बनाए रखेगा।

उन्होंने कहा, गुटनिरपेक्षता, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के पांच सिद्धांत, अंतरराष्ट्रीय कानून और विश्व शांति मार्गदर्शक की विदेश नीति के मानदंड। हम ‘सभी के साथ एकता और किसी के साथ भी शत्रुता नहीं’ में विश्वास करते हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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