परीक्षाओं में निगेटिव मार्किंग से छात्रों के मस्तिष्क पर पड़ता है असर : उच्च न्यायालय

0
307

जयपुर। मद्रास उच्च न्यायालय ने परीक्षाओं को लेकर और उन में हो रही ने की थी मांग को लेकर एक अहम बात कही है मद्रास उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को सीबीएसई द्वारा संचालित की जाने वाली जी की परीक्षा  प्रतियोगिताओं जैसी परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग को लेकर को कहा है कि इससे बच्चों के मस्तिष्क पर गलत प्रभाव पड़ता है और उन्हें बुद्धिमानी के अंदाजा लगाने से रोकता है .

इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति आर महादेवन ने दी परीक्षा में बैठे इस नेल्सन प्रभाकर की एक याचिका का निपटारा करते हुए यह बात कही है प्रभाकर ने 2013 में यह परीक्षा दी थी और उसके बाद उन्होंने यह याचिका दी थी जिसके बाद अब कोर्ट ने अपनी टिप्पणी देते हुए यह बात कही है.

आपको बता दें कि इस नेल्सन प्रभाकर ने ऐसी श्रेणी के तहत परीक्षा दी थी और नेगेटिव मार्किंग के चलते हुए कटऑफ से 3 नंबर पीछे रह गए थे जिसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी भौतिक और गणित की उत्तर पुस्तिकाओं का फिर से मूल्यांकन करने के लिए सीबीएसई को दिशा निर्देश देने के लिए कोर्ट का रुख किया था. वह चाहते थे कि उनकी कॉपियों की जांच वापस से हो.

इसके द्वारा दलित द्वारा अंतरिम राहत दिए जाने के बावजूद सीबीएसई ने उन्हें जी एडवांस में बैठने की इजाजत नहीं दी थी जिसके बाद में काफी हताश हुए थे और अब इस मामले में कोर्ट ने जो प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि एग्जाम में नेगेटिव मार्किंग क्या सर बच्चों के मस्तिष्क पर पड़ता है और जी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में नेगेटिव मार्किंग की व्यवस्था पर फिर से विचार किए जाने की जरूरत है क्योंकि यह मस्तिष्क के विकास को प्रभावित कर रहा है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here