पेरेंट्स का नकारात्मक रिएक्शन बच्चों में पैदा कर सकता है असुरक्षा की भावना

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अक्सर हम देखते है की कुछ बच्चे बहुत कम उम्र से ही कॉन्फिडेंस से भरपूर होते है वही कुछ बच्चे हमेशा डरे सहमे रहते है | एक ताज़ा अध्यन की रिपोर्ट के अनुसार इसका बड़ा कारण उनके माता – पिता के व्यव्हार से जुड़ा है |

जिन बच्चो के पेरेंट्स अपने नेगटिव इमोशनस पर काबू नहीं रख पाते उन बच्चो में असुरक्षा की भावना बेहद कच्ची उम्र में ही पनपने लगती है और इसके साथ ही ये बच्चे ध्यान न लगा पाना , चिडचिड़पन, झूठ बोलना व पढाई में पिछड़ जाना जैसी समस्याओ से भी घिर जाते है |

माता – पिता का गुस्सा , डर, जलन जैसी भावनाओ पर कण्ट्रोल न होना , बच्चो के मानसिक स्वास्थ्य पर बेहद बुरा असर डालता है , दूसरी और जो लोग अपने बच्चों के सामने पॉजिटिव इमोशंस दिखाते है , उनके बच्चो में आत्मविश्वास और आत्मबल जैसे गुण देखने को मिलते है |

माता पिता के लिए ये बेहद ज़रूरी है की वे बच्चो के सामने पॉसिटिविटी का माहौल बनाये रखे | उनके छोटे छोटे कार्यो की सराहना करें , और गलती होने पर भी डांट – फटकार या गुस्से से बचते हुए प्यार से समझाएं | इसके साथ ये भी जरूरी हैं की पेरेंट्स बचपन से ही बच्चों को छोटी छोटी जिम्मेदारियां सौपें लेकिन उन पर अति -महत्वकांशाओ का बोझ न लादे |

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