पूर्वोत्तर के साथ भावनात्मक जुड़ाव जरूरी : सुमित्रा महाजन

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लोकसभाध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सोमवार को कहा कि देश में पूर्वोत्तर के साथ भावनात्मक जुड़ाव का बोध कराने की आवश्यकता है, ताकि इस इलाके के लोग खुद को मुख्य धारा से अलग-थलग महसूस न करें। 17वें राष्ट्रमंडल संसदीय सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर यहां लोकसभाध्यक्ष ने कहा कि राष्ट्र के सर्वागीण विकास के लिए पूर्वोत्तर का विकास जरूरी है।

उन्होंने कहा, “लोकतंत्र के मूल तत्व को अक्षुण्ण बनाए रखने वाली पारदर्शी और उत्तरदायी संसद ही देश का सुदृढ़ व समुचित विकास सुनिश्चित करने का आधार है।”उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर की महिलाएं देश के अन्य भागों की महिलाओं से कहीं ज्यादा सशक्त हैं।

महाजन ने कहा, “इस इलाके की महिलाएं देश के अन्य भागों की महिलाओं से कहीं ज्यादा सशक्त हैं। मैरीकॉम, दीपा करमाकर और हिमा दास जैसी शख्सियत सही मायने में सक्षम माहौल की अवतार हैं।”

उन्होंने यहां असम के प्रशासनिक कर्मचारी महाविद्यालय में स्पीकर रिसर्च इनिशिएटिव (एसआरआई) के पूर्वोत्तर चैप्टर के लांचिंग कार्यक्रम की भी अध्यक्षता की।

महाजन ने कहा कि एसआरआई जैसे मंच से पूर्वोत्तर के विधायकों और नीति निर्माताओं को विद्रोह जैसी समस्याओं का स्वीकार्य समाधान तलाशने और क्षेत्र को तीव्र विकास के पथ पर अग्रसर करने के अवसर मिलेंगे।

असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल ने कहा कि सरकार पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए कारगर संसद आवश्यक है। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और सुशासन को प्रोत्साहन मिलता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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