जीआईएफटी में आईएलएंडएफएस की हिस्सेदारी गुजरात सरकार को बेचने को एनसीएलटी की मंजूरी

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राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) की प्रधान पीठ ने गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस टेक-सिटी कंपनी लिमिटेड (जीआईएफटीसीएल) में आईएलएंडएफएस की हिस्सेदारी गुजरात सरकार को बेचने की मंजूरी दे दी है। संकटग्रस्त आईएलएंडएफएस की जीआईएफटीसीएल में 50 फीसदी हिस्सेदारी है। एनसीएलटी के आदेश के मुताबिक, गुजरात सरकार ने जीआईएफटीसीएल कंपनी में आईएलएंडएफएस की हिस्सेदारी के लिए गुजरात सरकार ने 100 प्रतिशत इक्विटी मूल्य देने पर सहमति जताई है। इससे आईएलएंडएफएस को 32.70 करोड़ रुपये से अधिक का सकारात्मक मूल्य प्राप्त होगा।

आईएलएंडएफएस ने कहा है कि इस बिक्री से प्राप्त होने वाली राशि में से 61,84,403 लाख रुपये की राशि को समाधान प्रक्रिया लागत के तौर पर अलग रखा गया है।

हिस्सेदारी की बिक्री की राशि पर लागू करों का भी भुगतान इसी राशि से होगा। एनसीएलटी ने इसके साथ ही आईएलएंडएफएस को उसके विशेष खाते से तीन करोड़ रुपये की निकासी की भी अनुमति दी है। इस राशि का इस्तेमाल समाधान प्रक्रिया के अतिरिक्त खचरें के लिए किया जाएगा। इसके लिए कंपनी को न्यायाधिकरण द्वारा नियुक्त निदेशक मंडल की अनुमति लेनी होगी। यह विशेष खाता आईएलएंडएफएस को बिक्री से मिलने वाली राशि को रखने के लिए खोला गया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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