एनसीबी की 12,000 पेज की चार्जशीट औचित्यहीन : Riya’s lawyer

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अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के मामले में बॉलीवुड अभिनेत्री रिया चक्रवर्ती, उनके भाई शोविक समेत 31 लोगों के खिलाफ दायर एनसीबी (नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो) की 12,000 पेज की चार्जशीट को इनके वकील सतीश मानेशिंदे ने शनिवार औचित्यहीन करार दिया है।

मानेशिंदे ने कहा, “एनसीबी के सारे प्रयास रिया के लिए हैं ताकि किसी तरह से उन्हें फंसाया जा सके। पूरी की पूरी एनसीबी बॉलीवुड में ड्रग एंगल का पता लगाने के काम में लगी हुई है।”

उन्होंने आगे कहा, “यह चार्जशीट औचित्यहीन है, जो कि तूफान सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद भी एनडीपीएस अधिनियम की धारा 67 के तहत दर्ज किए गए अस्वीकार्य सबूतों और बयानों की नींव पर खड़ी है। रिया चक्रवर्ती पर आरोप लगाए जाने के अलावा इस केस में और कुछ भी नहीं है।”

चार्जशीट में एनसीबी ने दावा किया है कि इनके द्वारा कई तरह की नशीली दवाओं (चरस, गांजा, एलएसडी, एक्स्टसी) और साइकोट्रोपिक पदार्थो (अल्प्राजोलम और क्लोनाजेपम) की बरामदगी की गई है। एजेंसी के इस दावे को मानेशिंदे ने फालतू करार दिया है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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